धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट पर आपत्तियों पर सुनवाई की, 2 अप्रैल को स्थल निरीक्षण
मध्य प्रदेश की धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 अप्रैल को निर्धारित की और उससे पहले परिसर का स्थल निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
इंदौर। धार भोजशाला विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ की डबल बेंच—जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी—के समक्ष कुल पांच याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। इस सुनवाई में सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्क कोर्ट के सामने रखे।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और भोज उत्सव समिति की ओर से चार प्रमुख सुझाव अदालत के समक्ष पेश किए गए। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 98 दिन तक किए गए सर्वे की वीडियोग्राफी अदालत में उपलब्ध कराने की मांग की। कमाल मौला मस्जिद से जुड़े पक्षकारों ने भी अपने तर्क कोर्ट में रखे।
कोर्ट ने सभी आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया और कहा कि इन्हें 2 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई में शामिल किया जाएगा। इससे पहले, हाईकोर्ट का एक दल भोजशाला परिसर का स्थल निरीक्षण करेगा और मौके की स्थिति का सर्वे तैयार करेगा।
सुनवाई में उपस्थित लोग
सुनवाई में ASI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन उपस्थित रहे। राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और एडवोकेट विष्णुशंकर जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन भी अदालत में उपस्थित रहीं।
हिंदू फ्रंट के याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी भी अदालत में मौजूद रहे। कुल मिलाकर, पांच याचिकाओं में दायर पक्षकारों—काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह, मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी (धार) के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री—की ओर से अधिवक्ता पेश हुए।
ASI सर्वे और रिपोर्ट
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में निर्देश दिए थे कि सभी याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दो हफ्ते के भीतर ASI की 98 दिन तक चली सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दाखिल करें। ASI ने 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिन तक भोजशाला परिसर और उसके 50 मीटर की परिधि में सर्वे और सीमित उत्खनन किया। इस टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद्, रसायनविद् और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।
पिछली सुनवाई में अदालत ने पाया कि ASI रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और उसकी प्रतियां याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इसलिए इसे दोबारा अनसील करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव अगली सुनवाई से पहले दाखिल करें।
रिपोर्ट में मिले शिलालेख और निष्कर्ष
ASI की रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेख मिले। इनमें संस्कृत-प्राकृत, नागरी लिपि और अरबी-फारसी में लिखे शिलालेख शामिल हैं। कुछ शिलालेख धार्मिक गतिविधियों का संकेत देते हैं, जबकि कुछ शिक्षा केंद्र होने की संभावना दिखाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख पाए गए, जिनमें दुआएं, नाम और धार्मिक वाक्य लिखे हैं। 12वीं से 16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेखों में पारिजातमंजरी-नाटिका और अवनिकर्मसातम जैसे उल्लेख मिले। कुछ पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा उपयोग किए जाने के संकेत भी मिले। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि यह स्थल अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक उपयोग में रहा।
कोर्ट के अगले कदम और स्थल निरीक्षण
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। इससे पहले, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी खुद भोजशाला परिसर का निरीक्षण करेंगे। कोर्ट ने कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा और उसके बाद अन्य पक्षकारों की दलीलें सुनी जाएंगी।
सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार मामले की जल्दी सुनवाई होनी चाहिए, लेकिन इंटरविनर बनने से सुनवाई में देरी हो सकती है। इसलिए इंटरविनर को सबसे आखिरी में सुना जाएगा।
केस का इतिहास और ट्रांसफर
धार भोजशाला विवाद पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से जबलपुर स्थित प्रिंसिपल बेंच को ट्रांसफर किया गया था। 18 फरवरी को डिवीजन बेंच ने सुनवाई की और केस को वापस इंदौर खंडपीठ में भेजा। सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को इंदौर बेंच को निर्देश दिए थे कि तीन हफ्ते के भीतर सुनवाई आगे बढ़ाई जाए।
धार भोजशाला विवाद का मामला अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। ASI रिपोर्ट, पक्षकारों की आपत्तियां और कोर्ट द्वारा किए जाने वाले स्थल निरीक्षण के बाद अगली सुनवाई 2 अप्रैल को निर्णायक साबित हो सकती है। दोनों पक्षों की निगाहें इस सुनवाई पर लगी हैं।
Varsha Shrivastava 
