इंदौर में दूषित पानी बना जानलेवा: 3 की मौत, 35 बीमार, मंत्री के क्षेत्र में पानी का संकट

देश के सबसे स्वच्छ शहर में दूषित पानी की सप्लाई। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा का दूषित पानी पीने से अब तक 100 से ज्यादा लोग बीमार। सोमवार शाम को जब 35 से अधिक मरीज निजी अस्पतालों में पहुंचे तो मामले ने तूल पकड़ा और पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

इंदौर में दूषित पानी बना जानलेवा: 3 की मौत, 35 बीमार, मंत्री के क्षेत्र में पानी का संकट

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा नदी के पानी और नालियों के मिश्रित दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। इलाके में 24 दिसंबर से लोगों को उल्टी और दस्त की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अब तक लगभग 150 लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। सोमवार को ही 35 से अधिक मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हुए, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

इस संकट ने जानलेवा रूप भी ले लिया है। भागीरथपुरा के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। क्षेत्र की दो महिलाओं की निजी अस्पतालों में शुक्रवार और शनिवार को मौत हुई, जबकि एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ा। हालांकि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को दूसरी बीमारियों से जोड़ रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल हैं। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में नलों का पानी दूषित आ रहा था। उन्होंने कई बार नगर निगम और पार्षद को शिकायत की थी, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। हाल के दिनों में पानी में गंदगी इतनी अधिक थी कि घर की महिलाएं इसे पीने के बाद उल्टी और दस्त की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचीं। इनमें से एक महिला की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई, जबकि दूसरी का अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। नंदलाल पाल को 28 दिसंबर को दूषित पानी के सेवन के बाद भर्ती कराया गया था, लेकिन मंगलवार सुबह उनकी भी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उनकी मौत को कॉर्डियक अरेस्ट से जोड़कर बताया, लेकिन उन्हें दूषित पानी के कारण ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

भागीरथपुरा में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने सक्रिय प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की कमी न हो। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी दवाइयाँ, विशेषज्ञ डॉक्टर और अन्य संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि शिकायत मिलते ही चिकित्सा और प्रशासनिक टीमों को मौके पर भेजा गया है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी सोमवार रात वर्मा और त्रिवेणी अस्पताल पहुंचे, जहां 35 से अधिक मरीज भर्ती थे। उन्होंने मरीजों से बात कर आश्वस्त किया कि सरकार का उद्देश्य सभी का इलाज सुनिश्चित करना है। जिन लोगों ने पहले उपचार के लिए पैसे जमा किए थे, उनके पैसे भी वापस किए जाएंगे। मंत्री ने अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देश दिए कि संदिग्ध मरीजों के उपचार में कोई कमी न हो और सभी संसाधन जुटाए जाएं।

स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में बीमारी के फैलने के दो संभावित कारण सामने आए हैं। पहला, इलाके में चल रही खुदाई के दौरान ड्रेनेज लाइन फूटने से गंदगी सप्लाई लाइन में मिल गई। दूसरा, पानी की टंकी दूषित होने की आशंका है। नर्मदा जल सप्लाई वाले इस क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम और आशा-उषा कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार सैंपल लिए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक बीमारी के स्पष्ट कारण का पता नहीं चल पाया है।

स्थानीय लोगों ने उबालकर पानी पीने और सतर्क रहने की अपील की है। सीएमएचओ डॉक्टर माधव हासांक ने बताया कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन बढ़ती मरीज संख्या चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं और उनका समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने सोमवार को वार्ड कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड-30, 37 और 28 में गंदा पानी, कचरे के ढेर, चोक ड्रेनेज लाइन, टूटे चेंबर ढक्कन और नियमित सफाई न होने जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। कांग्रेस नेताओं ने शंख-घंटी बजाकर और मटके फोड़कर प्रदर्शन किया और संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा।

इंदौर, जिसे लंबे समय से देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, अब अपने स्वच्छता की छवि पर सवाल खड़ा कर रहा है। भागीरथपुरा में नल से आने वाले दूषित पानी ने दर्जनों लोगों को बीमार कर दिया, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसे शहर में गंदा पानी कैसे सप्लाई हुआ और जिम्मेदार विभाग कब इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गंदा पानी कैसे सप्लाई हुआ, इसकी जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता बीमार लोगों का इलाज है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए प्रशासन ठोस कदम उठाएगा।