INS महेंद्रगिरि नौसेना में शामिल: एंटी सबमरीन सिस्टम-एडवांस मिसाइलों से लैस युद्धपोत ने बढ़ाई भारत की समुद्री ताकत
भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती: प्रोजेक्ट-17A का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत INS महेंद्रगिरि को आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया। यह प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किया गया नीलगिरि श्रेणी का छठा स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। इस युद्धपोत के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।

INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है।
From strengthening our seas to shaping the maritime battlespace, #Mahendragiri is built for the future.
— IN (@IndiannavyMedia) July 10, 2026
India’s sixth #P17A stealth frigate blends advanced stealth, sensors, firepower and network-centric capabilities to operate across all domains.
A proud symbol of… pic.twitter.com/xAYpDRY0Ft
दुश्मन के लिए चुनौती बनेगी स्टेल्थ क्षमता
INS महेंद्रगिरि को आधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस किया गया है, जिसके कारण दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए इसे पहचानना कठिन होगा। इसकी डिजाइन और तकनीकी खूबियां इसे समुद्री अभियानों में अधिक प्रभावी बनाती हैं। यह युद्धपोत तेज गति से लंबी दूरी तक संचालन करने में सक्षम है और कठिन परिस्थितियों में भी मिशन को अंजाम दे सकता है।

इसमें कम्बाइंड डीजल और गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे बेहतर गति और संचालन क्षमता प्रदान करता है। यह भारतीय नौसेना के लिए समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, निगरानी और रणनीतिक अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा।
मिसाइल और एंटी-सबमरीन सिस्टम से लैस
INS महेंद्रगिरि में कई अत्याधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें सरफेस-टू-सर्फेस और सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं।

यह युद्धपोत एक साथ हवाई हमलों, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से मुकाबला करने में सक्षम है। इसकी बहुआयामी युद्ध क्षमता भारतीय नौसेना को समुद्री क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगी।
प्रोजेक्ट-17A से बढ़ेगी नौसेना की ताकत
प्रोजेक्ट-17A के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल सात स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से चार युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन युद्धपोत गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा रहे हैं।

यह परियोजना प्रोजेक्ट-17 शिवालिक क्लास फ्रिगेट का उन्नत संस्करण है। इसमें बड़े युद्धपोतों के निर्माण के लिए इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन यानी ब्लॉक निर्माण तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे जहाज निर्माण की प्रक्रिया तेज होती है और गुणवत्ता में सुधार आता है।
आंध्र प्रदेश बनेगा ड्रोन हब- राजनाथ सिंह
INS महेंद्रगिरि के कमीशनिंग कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल में ड्रोन कंपनियों के समूह के साथ ‘ड्रोन सिटी’ विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत को डायमंड सिटी और बेंगलुरु को सिलिकॉन वैली के रूप में पहचान मिली है, उसी तरह आने वाले समय में कुरनूल भारत के ड्रोन हब के रूप में उभर सकता है।
Varsha Shrivastava 
