काकोली घोष की चिट्ठी से टीएमसी में हलचल, कल्याण बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप….

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पार्टी के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी पर दुर्व्यवहार और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। संगठनात्मक पदों से इस्तीफे और Y+ सुरक्षा मिलने के बाद उनकी यह चिट्ठी बंगाल की राजनीति में नई हलचल और टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चा को तेज कर रही है।

काकोली घोष की चिट्ठी से टीएमसी में हलचल, कल्याण बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप….

तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार इन दिनों अपनी ही पार्टी से नाराज नजर आ रही हैं। उनकी नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। इतना ही नहीं, वे पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की अहम बैठकों से भी दूरी बनाए हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में तब और चर्चा तेज हो गई जब काकोली घोष एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल हुईं, जिसे भाजपा से जुड़ा माना जा रहा था। इसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी लगने लगीं। इसी बीच केंद्र सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध करा दी, जिससे चर्चाओं को और बल मिला। हालांकि, तमाम कयासों के बावजूद काकोली घोष ने न तो अपनी लोकसभा सदस्यता छोड़ी है और न ही तृणमूल कांग्रेस से अलग होने का कोई आधिकारिक ऐलान किया है। अब लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए उनके एक पत्र ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस चिट्ठी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं और इसे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कल्याण बनर्जी पर दुर्व्यवहार का आरोप

टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि संसद के भीतर उनके साथ कई बार ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ। काकोली का कहना है कि कल्याण बनर्जी ने उनके प्रति अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया और उनका रवैया सम्मानजनक नहीं था।

अपने पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं केवल उनके साथ ही नहीं हुईं, बल्कि पार्टी की अन्य महिला सांसदों को भी इसी तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। काकोली ने आरोप लगाया कि यह व्यवहार महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच को दर्शाता है और इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी है, ताकि पूरे मामले की जांच हो सके। खास बात यह है कि यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही काकोली घोष ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया था। उनके आरोपों ने न सिर्फ टीएमसी के भीतर हलचल बढ़ा दी है, बल्कि बंगाल की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है।

बंगाल की राजनीति में नई चर्चा

काकोली घोष की स्पीकर को लिखी चिट्ठी को राजनीतिक हलकों में सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से पार्टी के कुछ नेताओं के भाजपा में जाने की अटकलें लगती रही हैं, जिसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हो चुकी हैं।

हालांकि काकोली घोष ने अभी तक न टीएमसी छोड़ी है और न ही किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की है। लेकिन उनके हालिया कदमों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उनके इस रुख ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।