MP में पुल निर्माण के नाम पर 40.91 लाख का फर्जी बिल, EOW ने इंजीनियरों और ठेकेदार पर दर्ज की FIR

MP के सिंगरौली में च्यार नदी पुल निर्माण के फाइनल बिल में हेराफेरी का आरोप। 7.37 लाख के बिल को 40.91 लाख करने और MB गायब करने के मामले में EOW ने इंजीनियरों और ठेकेदार पर FIR दर्ज की।

MP में पुल निर्माण के नाम पर 40.91 लाख का फर्जी बिल, EOW ने इंजीनियरों और ठेकेदार पर दर्ज की FIR

Singrauli News: मध्य प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। इस बार मामला सिंगरौली जिले में च्यार नदी पर पुल निर्माण से जुड़ा है। यहां पुल निर्माण के अंतिम भुगतान में हेराफेरी, महत्वपूर्ण माप पुस्तिका (Measurement Book-MB) गायब करने और दस्तावेजों में काट-छांट कर फर्जी बिल तैयार करने के आरोप लगे हैं।

EOW की जांच के बाद इस मामले में तत्कालीन लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोप है कि सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और ठेकेदार को अनुचित लाभ दिलाने के लिए कथित तौर पर पूरी साजिश रची गई। 

7.37 लाख का बिल बदलकर 40.91 लाख किया

EOW की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, सिंगरौली जिले में च्यार नदी पर पुल और पहुंच मार्ग निर्माण का काम कराया गया था। इस प्रोजेक्ट की मूल संविदा लागत 574.32 लाख रुपये थी।

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जनवरी 2019 में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) सुशील कुमार मिश्रा ने 7,37,861 रुपये का अंतिम देयक भुगतान के लिए प्रस्तुत किया था। लेकिन आरोप है कि बाद में इस बिल में कूटरचना कर 40,91,300 रुपये का फर्जी अंतिम बिल तैयार कर लिया गया। इस तरह स्वीकृत अंतिम देयक और कथित तौर पर तैयार किए गए फर्जी बिल के बीच 33,53,439 रुपये का अंतर था।

माप पुस्तिका गायब की, दो MB में की गई काट-छांट

जांच में सामने आया कि इस कथित हेराफेरी को अंजाम देने के लिए कार्यालय के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ भी छेड़छाड़ की गई।

  • माप पुस्तिका क्रमांक 605 को कार्यालय से गायब कर दिया गया।

  • माप पुस्तिका क्रमांक 606 और 734 में काट-छांट की गई।

  • दस्तावेजों में बदलाव कर संशोधित अंतिम बिल तैयार किया गया।

  • कथित तौर पर इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पेनल्टी की राशि से बचना और अनुचित आर्थिक लाभ हासिल करना था।

16.78 लाख की पेनल्टी बचाने के लिए रची गई साजिश

EOW की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि निर्माण कार्य निर्धारित समय से पूरा नहीं किया गया था। ठेकेदार को देरी के कारण 16,78,437 रुपये की पेनल्टी यानी शास्ति/कटौती का सामना करना था।

आरोप है कि इसी पेनल्टी से बचने के लिए आपराधिक साजिश रची गई। दस्तावेजों में हेराफेरी कर अंतिम बिल की राशि बढ़ाई गई, ताकि शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सके और ठेकेदार को अनुचित लाभ मिल सके।

2018 में पूरा हुआ था निर्माण कार्य

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुल निर्माण का काम 05 फरवरी 2016 को शुरू किया गया था। इसे 18 महीने यानी 04 अप्रैल 2018 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, ठेकेदार ने निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं किया और करीब चार महीने की देरी के बाद 01 अगस्त 2018 को निर्माण कार्य पूरा किया। इसके बाद जनवरी 2019 में अंतिम भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत किया गया था।

ठेकेदार और PWD अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप

EOW ने जांच के बाद तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी सुशील कुमार मिश्रा, तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी, निर्माण कंपनी मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं 409, 420, 467, 468, 471, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7-C, 13(1)(क), 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। EOW की कार्रवाई के बाद अब यह मामला सरकारी निर्माण कार्यों में भुगतान, माप पुस्तिकाओं के रखरखाव और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े करता है।