जाति प्रमाण पत्र मामले में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को राहत, जांच समिति ने माना वैध
जाति प्रमाण पत्र मामले में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को राहत, जांच समिति ने माना वैध जांच समिति की क्लीन चिट से कांग्रेस के आरोपों को बड़ा झटका
भोपाल: मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में क्लीन चिट मिल गई है। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने उनके जाति प्रमाण पत्र को सही माना है। समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है। जल्द ही इसके आदेश जारी किए जा सकते हैं।
कांग्रेस ने की थी शिकायत
दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को अनुसूचित जाति (एससी) की जगह राजपूत समाज (सामान्य वर्ग) का बताते हुए एससी के लिए आरक्षित सीट से निर्वाचित होने की शिकायत की थी, जिस पर छह जुलाई को छानबीन समिति ने मंत्रालय में सुनवाई की।
मंत्री ने समिति के सामने रखे कई दस्तावेज
मंत्री ने खुद को एससी बताने के लिए कई प्रमाण दिए तो कुछ आरोपों का मौखिक तौर पर खंडन किया। उन्होंने समिति के समक्ष 110 वर्ष पुरानी खसरा-खतौनी की नकल प्रस्तुत कर बताया कि इसमें बागरी को कहीं भी राजपूत नहीं बताया गया है, न ही उप जाति में उल्लेख है।
उन्होंने यह तर्क भी दिया कि भाजपा ही नहीं, खुद कांग्रेस ने एससी के लिए आरक्षित विधानसभा सीट से बागरी समाज के लोगों को प्रत्याशी बनाया है। बताया कि अनुसूचित जाति के आरक्षित पन्ना जिले की गुनौर विधानसभा सीट से महेंद्र बागरी और काशी बागरी को प्रत्याशी बनाया गया। सतना जिले की रैगांव सीट से जहां से प्रतिमा विधायक हैं उनके दादा जुगल किशोर बागरी विधायक रहे।
शिकायतकर्ता ने भी सौंपे 430 पेज के दस्तावेज
शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने भी समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा था। उन्होंने 430 पेज के दस्तावेज समिति को सौंपे और कहा कि इसमें बागरी जाति के रहन-सहन और सभी राज्यों में सामान्य वर्ग में होने का उल्लेख है। यह तर्क भी दिया कि एससी-एसटी वर्ग में जाति का निर्धारण 1950 के भारत सरकार के गजट के अनुसार होता है, लेकिन इसमें तत्कालीन विंध्य प्रदेश के सतना जिले में बागरी शामिल नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा और महाराष्ट्र का गजट देकर बताया कि बागरी राजपूत में आते हैं।

