भोपाल में SC-ST-OBC का महासम्मेलन: IAS संतोष वर्मा का किया समर्थन, आरडी प्रजापति की कथावाचकों पर अभद्र टिप्पणी

अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन भेल दशहरा मैदान में आयोजित, प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग जुटे और आईएस संतोष वर्मा का समर्थन किया।

भोपाल में SC-ST-OBC का महासम्मेलन: IAS संतोष वर्मा का किया समर्थन, आरडी प्रजापति की कथावाचकों पर अभद्र टिप्पणी

भोपाल:अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा का महासम्मेलन भेल दशहरा मैदान में आयोजित किया गया.

आईएस संतोष वर्मा के समर्थन में जुटे हजारों लोग

जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग जुटे और उन्होंने आईएस संतोष वर्मा का समर्थन भी किया. सम्मेलन में मंच से नेताओं ने सामाजिक न्याय, आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सरकार के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया और वक्ताओं ने जमकर बयानबाजी की ।

ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग शिक्षा, रोजगार से दूर

संयुक्त मोर्चे के सम्मेलन  को जनआक्रोश महाआंदोलन नाम दिया गया था | नेताओं का कहना था कि ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग को आज भी शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बराबरी का हक नहीं मिल पा रहा है। संविधान में जो अधिकार इन वर्गों को दिए गए हैं, उनका पूरा लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है। इसी को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के नाम 20 सूत्रीय ज्ञापन सौंपने की बात कही गई। 

समानता और सामाजिक न्याय की मांग पर जोर

संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया कि इस महासम्मेलन का उद्देश्य समानता, सामाजिक न्याय, सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व की मांग को मजबूती से उठाना है। साथ ही लंबे समय से लंबित सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर उन्हें जल्द हल कराने की मांग भी सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रही। वही कई वक्ताओं ने उत्तेजक भाषण भी दिए |

पूर्व विधायक की कथावाचकों पर टिप्पणी

छतरपुर के चंदला से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति हैं.जिन्होंने कथावाचकों को लेकर विवादित बयान दिया है.भोपाल में पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के एक विवादित बयान ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कथावाचकों पर तीखा हमला बोलते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि कथावाचकों को जूते की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाना चाहिए। आरडी प्रजापति ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “अंधाचार्य” कहा, वहीं धीरेंद्र शास्त्री और अनिरुद्ध आचार्य के खिलाफ भी कड़े और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।