“कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा”: जनसुनवाई में बुजुर्ग ने कलेक्टर को दिखाए जिंदा होने के सबूत

आगर मालवा में नगर पालिका की लापरवाही से जिंदा बुजुर्ग को कागजों में मृत घोषित कर पेंशन व राशन बंद कर दिया गया, जिसके बाद जनसुनवाई में उसने अपने जीवित होने के सबूत पेश कर न्याय की गुहार लगाई।

“कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा”: जनसुनवाई में बुजुर्ग ने कलेक्टर को दिखाए जिंदा होने के सबूत

आगर मालवा: कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई मंगलवार को उस समय भावुक और चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिला, जब एक निराश्रित बुजुर्ग अपने जिंदा होने के सबूत लेकर कलेक्टर के समक्ष पहुँचा।

कागजों में मृत, हकीकत में जिंदा बुजुर्ग

बुजुर्ग ने अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर गुहार लगाई कि वह जीवित है, लेकिन नगर पालिका की घोर लापरवाही के चलते उसे कागजों में मृत घोषित कर दिया गया, जिसके कारण उसकी वृद्धावस्था पेंशन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन पूरी तरह बंद हो गया।

पेंशन और राशन पूरी तरह बंद

पीड़ित बुजुर्ग कचरूलाल ने बताया कि नगर पालिका द्वारा उसे मृत दर्शाए जाने के बाद न केवल उसकी पेंशन बंद हुई, बल्कि राशन भी नहीं मिल रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि उनके घर में खाने तक के लाले पड़ गए हैं। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई, जब बुजुर्ग की पत्नी ने बताया कि उसे भी पिछले छह महीनों से पेंशन नहीं मिली, जिससे दंपत्ति के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

नगर पालिका के चक्कर काट-काटकर थक गए बुजुर्ग 

बुजुर्ग की पत्नी ने जनसुनवाई में बताया कि वे कई बार नगर पालिका के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं। किसी ने भी उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। अंततः किसी परिचित की सलाह पर वे जनसुनवाई में पहुँचे, ताकि शायद यहां उनकी सुनवाई हो सके। मामले को सुनने के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने दंपत्ति को भरोसा दिलाया कि उनकी पेंशन और राशन शीघ्र बहाल कराया जाएगा और त्रुटि को सुधारा जाएगा। अधिकारियों ने संबंधित विभाग को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। इस पूरे मामले में नगर पालिका के सीएमओ कुशलसिंह डोडवे ने बताया कि बुजुर्ग की ई-केवाईसी नहीं होने के कारण तकनीकी रूप से समस्या आई है। उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी पूर्ण होते ही पेंशन और राशन से जुड़ी परेशानी स्वतः दूर हो जाएगी।

सिस्टम की गंभीर खामियों पर सवाल

हालांकि यह मामला सरकारी सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है, जहां एक जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया और महीनों तक कोई सुधार नहीं हुआ। सवाल यह है कि यदि बुजुर्ग जनसुनवाई तक नहीं पहुँचता तो क्या वह यूं ही कागजों में मृत बना रहता यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है. जिसने एक निराश्रित बुजुर्ग दंपत्ति को भूख और बेबसी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।