कांग्रेस ने भाजपा के शासन को कर्ज, क्राइम और करप्शन मॉडल करार दिया
मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने भाजपा शासन मॉडल को ‘कर्ज, क्राइम और करप्शन’ बताते हुए प्रशासनिक सेवाओं में व्यापक सुधार की मांग की।
भोपाल:मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार अब आरोप नहीं, बल्कि सरकार द्वारा स्वीकार की गई सच्चाई बन चुका है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण स्वयं मुख्य सचिव का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा कि प्रशासनिक काम बिना पैसे के नहीं होते और कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता।
कलेक्टर स्तर पर बिना पैसे कोई काम नहीं होता-मुकेश नायक
मुकेश नायक ने कहा कि यह बयान किसी विपक्षी नेता का नहीं, बल्कि राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी का है, जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कलेक्टर स्तर पर बिना पैसे कोई काम नहीं होता, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा और मुख्यमंत्री अब तक इस स्थिति पर क्या कर रहे थे? क्या इसे यह मान लिया जाए कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार एक स्वीकृत प्रशासनिक व्यवस्था बन चुका है?
आज भोपाल में प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष श्री मुकेश नायक जी ने प्रेसवार्ता को संबोधित किया. https://t.co/nyzXY3PJVs
— MP Congress (@INCMP) January 23, 2026
कई जिलों से कलेक्टरों पर भ्रष्टाचार के आरोप
मुकेश नायक ने कहा कि बीते दो वर्षों में प्रदेश के कई जिलों से कलेक्टरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। अशोकनगर में कलेक्टर पर तीन करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगे, जिसके चलते स्थानांतरण हुआ, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वहीं भिंड जिले में कलेक्टर और भाजपा विधायक के बीच सार्वजनिक विवाद ने प्रशासनिक फैसलों और अवैध वसूली को लेकर कई सवाल खड़े किए। इसके अलावा जमीन, रेत, शराब, खनन और ट्रांसफर-पोस्टिंग जैसे मामलों में कलेक्टर स्तर तक भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
भाजपा सरकार का मॉडल : कर्ज + क्राइम + करप्शन
मुकेश नायक ने भाजपा सरकार के शासन मॉडल को “कर्ज + क्राइम + करप्शन” बताते हुए कहा कि प्रदेश में जनता पर बढ़ता कर्ज, योजनाओं में कमीशनखोरी, ट्रांसफर-पोस्टिंग का खुला बाजार और प्रशासनिक संरक्षण में फलता-फूलता भ्रष्टाचार साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव का बयान यह साबित करता है कि सरकार भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम नहीं, बल्कि उसे सामान्य मान चुकी है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में चार प्रमुख मांगें रखीं—
1.मुख्य सचिव के बयान को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों की प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच कराई जाए।
2.बीते दो वर्षों में कलेक्टरों पर लगे सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।
3.मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि वे मुख्य सचिव के बयान से सहमत हैं या नहीं।
4.यदि बयान गलत है, तो मुख्य सचिव पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
भाजपा सरकार में सुशासन केवल एक नारा
मुकेश नायक ने कहा कि भाजपा सरकार में सुशासन केवल एक नारा बनकर रह गया है, जबकि भ्रष्टाचार इसकी असली पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब सरकार का शीर्ष अधिकारी यह स्वीकार करता है कि बिना पैसे कोई काम नहीं होता, तो यह पूरे सिस्टम पर नहीं, बल्कि सीधे भाजपा सरकार पर सवाल खड़ा करता है।
प्रशासनिक सेवाओं में की मांग
उन्होंने आगे कहा कि आजादी के बाद महात्मा गांधी और देश के नेताओं का सपना था कि प्रशासनिक सेवाएं जनोन्मुखी हों और न्याय प्रक्रिया समयबद्ध हो। लेकिन शक्तियों के केंद्रीकरण ने एकाधिकार और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। आज जरूरत है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवाओं में व्यापक सुधार किए जाएं और उन्हें जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाए।
sanjay patidar 
