मऊगंज में गौशाला अनुदान में 50 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप
मऊगंज में गौशाला अनुदान में 50 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप, तथाकथित रिश्वत से बंगला खरीदने का भी दावा
राजेंद्र पयासी मऊगंज: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिला मऊगंज में पशुपालन विभाग पर गौशालाओं के नाम पर करीब 50 करोड़ रुपये के अनुदान में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं और RTI से मिले दस्तावेजों से जिन गौशालाओं में गोवंश मौजूद नहीं हैं, वहां भी कागजों पर हजारों गायें दिखाकर हर महीने लाखों का भुगतान किया गया। वहीं रिश्वत के तौर पर मिले चेक से उपसंचालक के बेटे के नाम पर रीवा में मकान खरीदने का भी आरोप लगाया गया है।

आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
सरकारी 'गौ संवर्धन पोर्टल' के अनुसार मऊगंज जिले में 77 गौशालाएं संचालित हैं। नईगड़ी में 14, मऊगंज में 31 और हनुमना में 32 गौशालाएं दर्ज हैं। पोर्टल पर कुल 24,140 गोवंश दर्शाए गए हैं। राज्य सरकार प्रति गोवंश 40 रुपये प्रतिदिन के मान से चारा-भूसा अनुदान देती है। इस हिसाब से जिले में प्रतिदिन लगभग 9.65 लाख और महीने में करीब 2.90 करोड़ रुपये का भुगतान बनता है। हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा 56 गौशालाओं के भौतिक सत्यापन में सिर्फ 3,278 गोवंश मौके पर पाए जाने का दावा किया गया है। मलैगवा, बिछरहटा, सरदमन, हर्रई प्रताप सिंह, नाउन खुर्द, बेलहा, भाटी, खैरा और पथरौड़ा जैसी गौशालाओं में एक भी गोवंश नहीं मिलने की बात कही गई।

बेलहा की गौशाला बनी उदाहरण
ग्राम पंचायत बेलहा की गौशाला को लेकर सबसे गंभीर आरोप हैं। पंचायत द्वारा अब तक भवन का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद अक्टूबर 2025 तक यहां 42,57,800 रुपये का अनुदान जारी होने का दावा किया गया है। 22 मार्च 2025 को हुए संयुक्त जांच में रिपोर्ट में एक भी गोवंश न होने का उल्लेख है। 23 अक्टूबर 2025 को एक शिकायत के जवाब में उपसंचालक कार्यालय द्वारा पत्र क्रमांक 253 जारी कर कहा गया था कि 'माँ शारदा समिति' द्वारा संचालित इस गौशाला को कोई अनुदान प्राप्त नहीं हुआ। लेकिन इसके 2 महीने बाद ही 20 दिसंबर 2025 को अक्टूबर तक की राशि जारी कर दी गई। इस मामले में उप-सरपंच ने कलेक्टर को शिकायत दी है । 7 नवंबर 2025 को क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल ने विधानसभा में भी प्रश्न उठाया और गौशाला का निरीक्षण किया। आरोप है कि विधानसभा को भेजी गई जानकारी अधूरी थी। इसी तरह BVO मऊगंज के पत्र क्रमांक 93/2025 दिनांक 17.08.2025 में 'हर-हर नर्मदे गौशाला' में मौके पर 20 गोवंश पाए जाने का जिक्र है, जबकि भुगतान 297 गोवंश के आधार पर किया गया। दामोदरगढ़ गौशाला में दरवाजे तक न होने के बाद भी भुगतान का आरोप है।

रिश्वत और संपत्ति खरीद का आरोप
शिकायत में पशुपालन विभाग के उपसंचालक जे.एल. साकेत और कुछ गौशाला संचालकों पर तथाकथित मिलीभगत का आरोप है। दस्तावेजों के हवाले से कहा गया है कि 15 जुलाई 2025 को चेक क्रमांक 101807 के माध्यम से 7 लाख रुपये राम उजागर अवधिया को दिए गए। इसके अलावा चेक क्रमांक 101808, 101810 और 101813 से 5.5 लाख रुपये सदानंद पाठक के खाते के जरिए मकान मालिक को भेजे गए। आरोप है कि रीवा में लगभग 42 लाख रुपये में खरीदा गया मकान उपसंचालक के पुत्र पुनीत कुमार साकेत के नाम रजिस्ट्री हुआ है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पुनीत की आय का कोई ज्ञात स्रोत नहीं है।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उपसंचालक, उनके परिजन, बिचौलियों और संबंधित गौशाला संचालकों के बैंक खातों की जांच ED या लोकायुक्त से कराई जाए तो पूरे सिंडिकेट का खुलासा हो सकता है। उनका आरोप है कि पोर्टल पर एंट्री से लेकर भौतिक सत्यापन तक पूरा खेल 'सेटिंग' से चल रहा है।

आरोप पर क्या बोले डिप्टी डायरेक्टर
पूरे मामले पर डिप्टी डायरेक्टर पशु चिकित्सा जिला मऊगंज डॉ जे.एल साकेत से जब दूरभाष पर बात हुई तो उन्होंने पूरे मामले को सिरे से नकारते हुए कहा कि बेटे के नाम पर घर खरीदा है। जिसके लिए मैंने बैंक से कर्ज लिया है मैं स्वय डेढ़ लाख रुपए वेतन पाता हूं। पर्याप्त कृषि कार्य होता है अकेला बेटा है जो मोबाइल की दुकान चलाता है। और जो संपत्ति मैं बनाऊंगा तो बेटे के नाम ही बनाऊंगा और भविष्य में भी मेरी पूरी संपत्ति बेटे की ही होगी।
जहां तक लेनदेन की बात है तो मुझे पैसा जब घटा तो मैंने अपने साथी से कर्ज बतौर चेक के माध्यम से लिया है। गौशालाओं से संबंधित लगाए गए आरोप पूर्ण रूपेण गलत है पूरे मामले की यदि जांच कराई जाए तो सब कुछ साफ हो जाएगा। रही बात गौशालाओं में अनुदान राशि भुगतान की तो जिस दौरान गौशालाओं में मवेशी रहे उस समय भुगतान हुआ है जब मवेशी गौशालाओं में नहीं मिले उस समय भुगतान नहीं किया गया।

