UGC के नए नियमों पर SC की रोक, CJI बोले- प्रावधान अस्पष्ट, हो सकता है दुरुपयोग
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। देशभर में भारी विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और इनके खिलाफ देशभर में विरोध हो रहा है।
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई पर सहमति जताते हुए कहा कि वह मामले से अवगत है। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों पर बड़ा फैसला सुनाया और UGC की नई गाइडलाइन्स पर तत्काल रोक लगा दी है। SC ने UGC के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताते हुए स्थगित कर दिया है।
पुराने नियम रहेंगे लागू
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि, इस नियम को स्पष्ट करने की जरूरत है। तब तक 2012 के पुराने UGC नियम लागू रहेंगे।
मामले में CJI की बड़ी टिप्पणी
CJI सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि, आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं। अब क्या इस नए कानून से हम और पीछे की ओर जा रहे हैं ?' याचिकाकर्ता ने कहा कि रैगिंग होगी और रैगिंग करने वाले छात्र शिकायत भी करेंगे। CJI सूर्यकांत ने केंद्र से पूछा, हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं ?
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि संविधान राज्य को SC-ST के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है। यदि 2012 के नियमों में व्यापक सुरक्षा की बात की गई है तो क्या सामाजिक न्याय की सुरक्षा वाले कानून में बचाव के उपाय होना चाहिए ? हमें ऐसे स्तर पर नहीं जाना चाहिए जहां हमने संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह स्कूलों को अलग कर दिया हो।
बता दें कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन ने नए नियमों का 13 जनवरी 2026 को नोटिस जारी किया था। इन नए नियमों के मुताबिक, सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटी हर जगह एक 'Equity Cell' बनाने को कहा गया था। जिसमें अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है, तो वह इक्वालिटी सेल में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता था। इसके बाद संस्थान को तुरंत छात्र पर एक्शन लेना पड़ता। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
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