पशुपालन विभाग का बजट 2 साल में 71% बढ़ा, दुग्ध उत्पादन 20% तक ले जाने का लक्ष्य: मंत्री लखन पटेल

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने विभाग की बीते दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी दी। इस दौरान प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव भी मौजूद रहे।

पशुपालन विभाग का बजट 2 साल में 71% बढ़ा, दुग्ध उत्पादन 20% तक ले जाने का लक्ष्य: मंत्री लखन पटेल
MP Minister Lakhan Patel

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग ने 2 सालों में उल्लेखनीय प्रगति करने के साथ आने वाले 3 सालों के लिए महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने विभाग की दो साल की उपलब्धियों और आगामी तीन सालों के लक्ष्यों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव भी उपस्थित रहे।

मंत्री लखन पटेल ने बताया कि हालिया सर्वे के अनुसार मध्यप्रदेश में लगभग 1 करोड़ 87 लाख गौवंश मौजूद हैं, जिनमें से करीब 70 प्रतिशत गौवंश अवर्णित नस्ल का है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और गौवंश संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि गौसंवर्धन के लिए वर्ष 2022-23 में जहां बजट लगभग 90 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो गया है। आने वाले वर्षों में इस बजट को 700 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह विभाग का कुल बजट वर्ष 2022-23 में 1450 करोड़ रुपये था, जो वर्तमान में बढ़कर 2483 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 71 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

कामधेनु और स्वावलंबी गौशाला योजना

मंत्री पटेल ने मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के अंतर्गत यदि कोई पात्र हितग्राही 200 गौवंश या 200 भैंसवंश पालता है, तो उस पर लगभग पौने चार करोड़ रुपये की लागत आती है। इसमें सरकार की ओर से 25 से 33 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जो लगभग 90 लाख रुपये के आसपास होता है।

इसके अलावा स्वावलंबी गौशाला योजना को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत कम से कम 5 हजार गौवंश रखने की क्षमता वाली गौशालाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें 30 प्रतिशत दुधारू पशु रखने की अनुमति होगी। फिलहाल प्रदेश के 19 जिलों में 20 टेंडर जारी किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि पहले चरण में कम टेंडर आने के कारण प्रक्रिया दोबारा की जा रही है।

दुग्ध उत्पादन और कलेक्शन में बढ़ोतरी

मंत्री लखन पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री का सपना है कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। पहले जहां प्रदेश में 9 लाख लीटर प्रतिदिन दूध का कलेक्शन होता था, वह अब बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 33 लाख लीटर प्रतिदिन तक ले जाने का है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 900 से अधिक दुग्ध समितियां कार्य कर रही हैं और भविष्य में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी। दुग्ध संपर्क अभियान के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं, जिससे किसानों को दूध के बेहतर दाम मिल रहे हैं और उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

नियुक्तियां और प्रशिक्षण

पशुपालन विभाग ने बीते दो वर्षों में 70 पशु चिकित्सकों और 589 ईवीएफओ (एक्सटेंशन वेटरनरी फील्ड ऑफिसर) की नियुक्ति की है। इसके अलावा अगले 2 से 3 महीनों में 192 पशु शल्य चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि पशुपालन विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की लंबे समय से मांग थी कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड बढ़ाया जाए। इस मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने स्टाइपेंड में 52 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 10 हजार रुपये कर दिया है।

गौशालाओं के लिए अहम फैसले

मंत्री पटेल ने कहा कि सरकार ने गौशालाओं में रखे जाने वाले गौवंश की निगरानी के लिए चिप आधारित सिस्टम विकसित किया है, जिससे यह पता चल सकेगा कि किस गौशाला में कितनी गायें हैं। इसके साथ ही गौशालाओं के स्ट्रक्चर और संचालन से जुड़े नॉर्म्स भी तय कर दिए गए हैं।

सरकार ने प्रत्येक गौशाला में गायों के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौमाता प्रतिदिन कर दिया है। दो साल पहले प्रदेश में जहां 1800 गौशालाएं पंजीकृत थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 2900 हो गई है, जिनमें करीब 4 लाख 75 हजार गौवंश के रखने की व्यवस्था की गई है।

कड़कनाथ और सड़क पर घूमते गौवंश पर बयान

पत्रकारों के सवालों के जवाब में मंत्री लखन पटेल और प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने स्पष्ट किया कि वे कड़कनाथ नहीं खाते और शाकाहारी हैं, लेकिन कड़कनाथ की बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग भविष्य में इसके लिए योजना बनाकर उसे लागू करेगा।

सड़कों पर घूमते गौवंश को लेकर मंत्री ने कहा कि समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। केवल दूध निकालकर गायों को छोड़ देना गलत प्रथा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष सड़कों पर गौवंश की संख्या में कमी आई है।

पशुपालन विभाग के भविष्य की कार्ययोजना

आने वाले तीन वर्षों में विभाग का लक्ष्य है कि 40 लाख प्रजनन योग्य गौवंश का कृत्रिम गर्भाधान किया जाए, जिससे अच्छी नस्ल की बछियों का जन्म हो सके। इसके अलावा नए पंचायतों के लिए 9 हजार पशु मैत्रियों को प्रशिक्षण देकर गांवों में तैनात किया जाएगा। प्रत्येक जिले में कम से कम एक स्वावलंबी गौशाला स्थापित की जाएगी, जिनकी क्षमता 5 हजार से 25 हजार गौवंश तक होगी।

पत्रकार वार्ता के अंत में मंत्री लखन पटेल ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए पशुपालन से बेहतर कोई विकल्प नहीं है, और राज्य सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।