हर जगह अवैध खनिज बाजार : सरिया की दुकान में गिट्टी, गुमटी में रेत, विभाग को नहीं दिख रहा अवैध भंडारण

Mauganj News : वैध कारोबारी गिने-चुने, अवैध का जाल पूरे जिले में - राजस्व को करोड़ों का चूना, खदान से सड़क तक दिखावे की कार्यवाही

हर जगह अवैध खनिज बाजार : सरिया की दुकान में गिट्टी, गुमटी में रेत, विभाग को नहीं दिख रहा अवैध भंडारण

राजेंद्र पयासी @ मऊगंज

मऊगंज जिले में वैधानिक रूप से स्वीकृत खनिज कारोबारी कितने हैं? उन्हें किस खनिज के भंडारण और विक्रय की अनुमति प्राप्त है? कितनों की वैधता समाप्त हो चुकी है और कितनों का नवीनीकरण लंबित है? इन सवालों की जमीनी पड़ताल करने पर जो तस्वीर सामने आती है, वह चौंकाने वाली है। आरोप है कि जिले में खनिज कारोबार का बड़ा हिस्सा अवैध रूप से संचालित हो रहा है। शहर से लेकर गांव-गांव तक रेत, गिट्टी के अवैध भंडारण केंद्र संचालित हैं, लेकिन खनिज विभाग द्वारा आज तक इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। विभाग की इसी कथित अनदेखी के चलते अवैध भंडारण का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है।

दर्जनों स्थानों पर नियम विरुद्ध भंडारण : 

जानकारी के अनुसार जिले में एक दर्जनों ऐसे ठिकाने हैं जहां रेत, गिट्टी, बोल्डर, मुरूम का भंडारण कर खुलेआम बिक्री की जा रही है। सबसे अधिक कारोबार रेत और गिट्टी का है, जिसकी मांग निर्माण कार्यों के चलते बारह महीने बनी रहती है।

जिला मुख्यालय के हनुमना रोड, देवतालाब रोड, नईगढ़ी रोड से लेकर ग्रामीण अंचलों के हाट-बाजारों तक हर जगह अवैध भंडारण देखा जा सकता है। यहाँ तक कि कई स्थानों पर सरिया-सीमेंट की दुकानों की आड़ में गिट्टी और बालू की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। 

आशंका है कि अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन से लाई गई सामग्री ही इन भंडारण केंद्रों पर जमा कर ऊंचे दामों पर बेची जाती है। इससे शासन को प्रतिमाह लाखों रुपये के राजस्व की क्षति होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन विभाग द्वारा आज तक न तो क्षति का आकलन किया गया और न ही भंडारण केंद्रों का भौतिक सत्यापन।

जांच और कार्रवाई पर उठ रहे सवाल : 

खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग द्वारा कभी-कभार खदानों और मुख्य सड़कों पर अवैध परिवहन के खिलाफ कार्यवाही जरूर की जाती है, प्रकरण भी दर्ज होते हैं, लेकिन जिले में आज तक अवैध भंडारण के खिलाफ कोई सघन अभियान, जांच या सीलिंग की कार्यवाही देखने को नहीं मिली।

जबकि नियमानुसार प्रत्येक भंडारण केंद्र के पास वैध अनुज्ञप्ति, स्टॉक रजिस्टर और परिवहन पर्ची होना अनिवार्य है। अधिकांश ठिकानों पर ये दस्तावेज नहीं होने की बात सामने आ रही है। बावजूद इसके उनके डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बेरोकटोक सामग्री पहुँचा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों और वैध कारोबारियों का कहना है कि यदि विभाग सभी भंडारण केंद्रों का सर्वे कर लाइसेंस, स्टॉक और स्रोत की जांच करे तो अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के पूरे नेटवर्क पर अंकुश लग सकता है और शासन के राजस्व में भी वृद्धि होगी। आवश्यकता है कि विभाग पारदर्शी सूची सार्वजनिक करे कि जिले में किसे, कहां और किस खनिज के भंडारण की अनुमति है, ताकि अवैध और वैध का फर्क साफ हो सके।

उधर जिले में अवैध खनिज भंडारण को लेकर जब सहायक खनिज अधिकारी सुनीत राजपूत से दूरभाष पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन पर जानकारी देने से इंकार करते हुए कार्यालय में संपर्क करने की बात कहकर संपर्क काट दिया। उनका पक्ष न आने से इस मामले में विभाग का आधिकारिक वर्जन लंबित है।