इंदौर में जल संकट की आहट: पानी बर्बाद करने पर लगेगा जुर्माना, महापौर-कांग्रेस में टकराव
इंदौर शहर में जल संकट की आहट के बीच पानी की बर्बादी रोकने को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। वाहन धोने और पाइप से फर्श साफ करने वालों पर जुर्माना लगाने तथा एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे आमने-सामने आ गए हैं।
Water crisis in Indore : इंदौर शहर में जल संकट की आहट के बीच पानी की बर्बादी रोकने को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। वाहन धोने और पाइप से फर्श साफ करने वालों पर जुर्माना लगाने तथा एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे आमने-सामने आ गए हैं। महापौर जहां जल संरक्षण के लिए सख्ती की बात कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस ने इसे जनता को डराने की कोशिश बताते हुए नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
व्यर्थ पानी बहाने पर लगेगा जुर्माना
सोमवार को इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव एमआईसी सदस्य अभिषेक बबलू शर्मा के साथ इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र में दौरा कर रहे थे, जहां उन्होंने निर्देश दिए की व्यर्थ पानी बहाकर गाड़ियां धोना, घरों के बाहर बने फर्श साफ करना, और सड़कों पर पानी बहाने पर निगम अब जुर्माना लगाने जा रहा है। साथ ही, यदि बार-बार चुनिंदा घरों द्वारा पानी बहाने की शिकायत सामने आई तो उनके खिलाफ एफआईआर करने की भी बात की जा रही है।
भूजल स्तर गिरने और बोरिंग सूखने की आशंका
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक, इस वर्ष कम बारिश के कारण आने वाले महीनों में भूजल स्तर गिरने और बोरिंग सूखने की आशंका है। ऐसे में शहर में जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। नगर निगम और एनजीओ की टीमें लोगों को जागरूक करने के साथ पानी की बर्बादी पर नजर रख रही हैं। पाइप से गाड़ियां और फर्श धोने जैसी गतिविधियों पर शिकायत मिलने पर चालानी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष का महापौर पर तीखा हमला
इस मामले में शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने प्रेस वार्ता में महापौर के बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पानी बचाने के नाम पर जनता में एफआईआर का डर पैदा किया जा रहा है। चौकसे का दावा है कि इंदौर के 75 से 80 प्रतिशत इलाकों में लोग आज भी गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में परेशानी है, तो केवल कार्रवाई की चेतावनी देने से समस्या कैसे सुलझेगी? चौकसे ने पानी बचाने की जरूरत स्वीकार करते हुए प्रशासन से संवाद और जन जागरूकता के जरिए अभियान चलाने की मांग की।
जल संरक्षण अभियान कितना प्रभावी?
इस पूरे विवाद में एक ओर जल संरक्षण के लिए सख्ती की दलील है, तो दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं को लेकर जवाबदेही का सवाल।अब देखना होगा कि निगम की कार्रवाई के साथ जल संरक्षण अभियान कितना प्रभावी होता है और शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।

