रीवा में परमाणु प्लांट, पन्ना में विस्थापन और OBC आरक्षण: उमंग सिंघार ने BJP सरकार को घेरा, कोर्ट जाने की दी चेतावनी
रीवा परमाणु प्लांट पर उमंग सिंघार का सरकार से सवाल- क्या लोगों को मारना चाहती है सरकार? केन-बेतवा मुआवजे पर भी घेरा
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रीवा के प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर, पन्ना में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विस्थापन और ओबीसी आरक्षण समेत कई मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। सोमवार को भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों, आदिवासियों, दलितों और किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने रीवा परमाणु परियोजना की साइट बदलने, विस्थापन के मामलों की जांच कराने और जरूरत पड़ने पर अदालत जाने की बात कही।
रीवा परमाणु प्लांट की साइट बदलने की मांग
सिंघार ने रीवा जिले के सिरमौर-मनगवां क्षेत्र के सरई गांव में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए सरकारी जमीन के अलावा करीब 150 हेक्टेयर निजी जमीन के अधिग्रहण की बात सामने आई है। उनके मुताबिक, इससे गरीब आदिवासी, दलित और किसान प्रभावित हो सकते हैं।
सिंघार ने परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु संयंत्र स्थापित करना कितना उचित है। उन्होंने कहा, क्या सरकार कैंसर के लिए पावर प्लांट डालना चाहती है? क्या आसपास के लोगों को मारना चाहती है? उन्होंने परियोजना की साइट बदलने की मांग करते हुए कहा कि स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से जल सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
हालांकि, परमाणु संयंत्र से कैंसर फैलने संबंधी आशंका को लेकर कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष या आधिकारिक रिपोर्ट उनके बयान में प्रस्तुत नहीं की गई। इस संबंध में परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन महत्वपूर्ण होगा।
ग्रामसभा की अनुमति और फर्जी दस्तावेज
नेता प्रतिपक्ष ने परियोजना के लिए बोरिंग की अनुमति से जुड़े दस्तावेज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा की असहमति के बावजूद पंचायत की अनुमति होने का दावा किया जा रहा है। सिंघार के अनुसार, सरपंच कोमल संजय सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर दस्तावेज को फर्जी बताया है। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की।
उमंग सिंघार ने ग्रामीणों को कथित रूप से धमकाए जाने का आरोप भी लगाया। इसके साथ ही जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल की मौत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौत की परिस्थितियों को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
केन-बेतवा परियोजना में मुआवजे पर सवाल
उमंग सिंघार ने पन्ना जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और मझगांव-रुंज परियोजना से प्रभावित लोगों के विस्थापन तथा मुआवजे के वितरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया, जो वास्तव में परियोजना से प्रभावित नहीं हैं, जबकि पात्र लोगों को अब तक उनका हक नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि कई प्रभावित परिवारों के जॉइंट बैंक खाते तक नहीं खुल पाए हैं। सिंघार ने सरकार से मुआवजा वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की। उन्होंने आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाते हुए उनकी रिहाई के लिए भी सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की।
OBC आरक्षण और राज्यसभा चुनाव
उमंग सिंघार ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ओबीसी वर्ग का समर्थन तो चाहती है, लेकिन आरक्षण के सवाल पर ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने सर्वदलीय सहमति से प्रस्ताव पारित करने की मांग भी रखी।
राज्यसभा उपचुनाव को लेकर सिंघार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपने हिसाब से मुख्यमंत्री, विधायक और सांसद तय करती है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए। वहीं, कांग्रेस की राज्यसभा चुनाव रणनीति के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय उचित समय पर सामने आएगा।
कांग्रेस अदालत जाने की तैयारी में
उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस रीवा परमाणु परियोजना और स्थानीय लोगों से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाएगी। जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। उन्होंने सरकार से प्रभावित ग्रामीणों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी सहमति, जमीन तथा मुआवजे से जुड़े सवालों का जवाब देने की मांग की।
रीवा परमाणु परियोजना से लेकर केन-बेतवा विस्थापन तक, सिंघार के आरोपों ने प्रदेश में विकास परियोजनाओं, स्थानीय लोगों के अधिकारों और सरकारी जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। अब इन मामलों में सरकार और संबंधित प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
Varsha Shrivastava 
