Ramesh Thete Arrested : पूर्व IAS रमेश थेटे नागपुर से गिरफ्तार, कोर्ट ने जारी किया था वारंट

Ramesh Thete Arrested : पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे को पुलिस ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

Ramesh Thete Arrested : पूर्व IAS रमेश थेटे नागपुर से गिरफ्तार, कोर्ट ने जारी किया था वारंट

Ramesh Thete Arrested : भोपाल। मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी रमेश थेटे को भोपाल पुलिस ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, अदालत में लगातार पेश नहीं होने और नोटिस का जवाब नहीं देने के मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 299 के तहत फरार घोषित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। भोपाल की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कल्पना कोतवाल ने वारंट जारी किया था। पुलिस उन्हें नागपुर से भोपाल लाने और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में जुटी है। 

अदालत के आदेश पर हुई कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, न्यायालय की ओर से लगातार नोटिस और समन जारी किए जाने के बावजूद रमेश थेटे पेश नहीं हुए थे। इसके बाद अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसी आदेश के पालन में भोपाल पुलिस की टीम नागपुर पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब उन्हें संबंधित अदालत में पेश किया जाना है। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होगी। गिरफ्तारी और वारंट से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही कानूनी स्थिति की पूरी जानकारी सामने आएगी।

आय से अधिक संपत्ति मामले में भी रहे चर्चा में

रमेश थेटे और उनकी पत्नी मंदा थेटे के खिलाफ लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा मामला दर्ज किया था। दोनों ने विभिन्न बैंकों से करीब 68 लाख रुपये का कर्ज लिया था और वर्ष 2012-13 के दौरान इसे चुकाने की जानकारी जांच के दायरे में आई थी।

वर्ष 2013 में शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने जांच शुरू की थी। जांच में कथित तौर पर उनकी संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई। हालांकि, इन आरोपों और मामले की वर्तमान स्थिति की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

1993 बैच के अधिकारी रहे हैं रमेश थेटे

रमेश थेटे 1993 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। सेवाकाल के दौरान भी वह कई विवादों और कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2002 में बैतूल के आईटीआई में प्राचार्य रहते हुए उन्हें कथित रिश्वत मामले में पकड़ा गया था। वर्ष 2005 में उनके निलंबन और बाद में सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई थी।

हालांकि, उन्होंने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी थी और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था। वर्ष 2015 में उनके खिलाफ कुछ मामलों में अभियोजन की मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। उनकी मौजूदा गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।