चिता आंदोलन का 11वां दिन, अमित भटनागर का आमरण अनशन 8वें दिन जारी
छतरपुर में केन-बेतवा लिंक सहित विभिन्न परियोजनाओं के प्रभावितों का चिता आंदोलन 11वें दिन जारी है। अमित भटनागर का आमरण अनशन आठवें दिन पहुंचा और अब सूली आंदोलन भी शुरू किया गया है।
छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांव, रूंझ, नैगुवा और एनटीपीसी से जुड़ी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा ‘चिता आंदोलन’ 11वें दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में अब ‘सूली आंदोलन’ भी शुरू किया गया है। वहीं, अमित भटनागर का आमरण अनशन आठवें दिन में प्रवेश कर गया है।
आंदोलनकारी चिता आंदोलन के साथ मिट्टी सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह के जरिए अपनी मांगें उठा रहे थे। अब प्रदर्शन के नए स्वरूप के तहत विस्थापित ग्रामीणों ने सांकेतिक रूप से सूली पर लटककर विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों का नारा है—“न्याय दो या मार दो।”
आठवें दिन भी मेडिकल परीक्षण नहीं होने का आरोप
परियोजना प्रभावितों को न्याय दिलाने और कथित भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की मांग को लेकर अमित भटनागर का आमरण अनशन आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों के मुताबिक, लगातार अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य गिर रहा है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया।
वहीं, पांच दिनों से आमरण अनशन पर बैठीं पूना आदिवासी की तबीयत भी अचानक खराब होने का दावा किया गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि धरना स्थल पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और डॉक्टर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि सामने नहीं आई है।
चिता, फांसी और सूली के प्रतीकों से विरोध
परियोजना प्रभावित ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराने के लिए बेहद मार्मिक और प्रतीकात्मक तरीके अपनाए हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण सांकेतिक रूप से गले में फांसी का फंदा डालकर, सूली पर लटककर और चिताओं के प्रतीकों के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इन प्रतीकों के जरिए वे सरकार और प्रशासन को यह बताना चाहते हैं कि विस्थापन के कारण उनकी जमीन, आजीविका और पहचान खतरे में है।
‘मिट्टी से बेदखली, मौत से बदतर’
आंदोलन में शामिल ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्वास और मुआवजे को लेकर किए गए वादों और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर है। उनका कहना है कि खेती की जमीन जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और वर्षों से शासन-प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
एक आंदोलनकारी ग्रामीण ने कहा, “हमारी जमीन ही हमारी मां और हमारी पहचान है। अगर हमें सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला तो हम इसी मिट्टी में दफन होने को तैयार हैं।”
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना ग्रामसभा और पारदर्शी सर्वे के कथित गैरकानूनी बेदखली स्वीकार नहीं करेंगे।
कलेक्टर पर अमित भटनागर ने लगाए गंभीर आरोप
अमित भटनागर ने प्रशासन और कलेक्टर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया, “जब कलेक्टर ही भ्रष्टाचार को संरक्षण दें, तब न्याय की उम्मीद किससे करें?”
यह अमित भटनागर और आंदोलनकारियों का आरोप है। इस संबंध में जिला प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
मुआवजा और पुनर्वास में विसंगतियों का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि परियोजना प्रभावित कई परिवारों को अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला है। उनका दावा है कि मुआवजा वितरण और प्रभावितों की सूची में भी अनियमितताएं हुई हैं।
प्रदर्शनकारी इन मामलों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच के साथ वास्तविक प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास देने की मांग कर रहे हैं।
पूना आदिवासी का आमरण अनशन भी पांचवें दिन
अमित भटनागर के साथ पूना आदिवासी का आमरण अनशन भी पांचवें दिन जारी रहा। इसके अलावा सोमरनी आदिवासी, रामकली आदिवासी, हरवाई आदिवासी, पानबाई आदिवासी, कलावती आदिवासी, चम्पा आदिवासी, मझली बहू आदिवासी, अंगी बाई आदिवासी, अगना बाई आदिवासी, आशा आदिवासी, रानी आदिवासी, चंदा आदिवासी, ग्याप्रसाद कोंदर, लक्ष्मण कोंदर, बाबूलाल आदिवासी, हरि आदिवासी और तोरण सिंह आदिवासी सहित कई लोग अनशन और आंदोलन में शामिल रहे।
आंदोलनकारियों ने कहा है कि जब तक सभी विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलता तथा कथित भ्रष्टाचार के मामलों की उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
Anubhav Dubey 
