Bhojshala विवाद में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सभी याचिकाओं पर होगी सुनवाई
धार के भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मंदिर घोषित करने वाले फैसले को चुनौती दी गई है।
धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट में आगे बढ़ने जा रही है। सोमवार, 13 जुलाई को सर्वोच्च अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी। हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को अपने फैसले में भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी यानी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना था।
हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से मांग की गई कि मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की जाए।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने रखा गया। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और अधिवक्ता निजाम पाशा अदालत में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने अदालत को बताया कि भोजशाला मामले की सुनवाई 14 जुलाई के लिए तय की गई थी, लेकिन इससे जुड़ी कई याचिकाएं सूची में शामिल नहीं थीं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित याचिकाओं की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा और सभी याचिकाओं को 14 जुलाई को सूचीबद्ध करने की बात कही।
इस फैसले से मुस्लिम पक्ष को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि अब हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
भोजशाला पर क्या है हिंदू और मुस्लिम पक्ष का दावा?
धार का भोजशाला परिसर लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज के काल से जुड़ा प्राचीन भोजशाला मंदिर और देवी वाग्देवी का स्थान मानता है। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इसे ऐतिहासिक कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है।
यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के संरक्षण में है। परिसर में धार्मिक गतिविधियों और उसके ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर दोनों पक्षों के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है।
15 मई को हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को भोजशाला मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी ASI के पास ही रहने दी।
हाईकोर्ट ने हिंदू समुदाय के पूजा के अधिकार को मान्यता दी। इसके साथ ही ASI के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार से यह भी कहा था कि यदि मुस्लिम समुदाय धार जिले में मस्जिद निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने का आवेदन करता है, तो सरकार अलग स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने के अनुरोध पर विचार करे।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला विवाद ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा चाहता है। संबंधित सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद अब यह मामला एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के सामने होगा।
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका असर भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज के अधिकार से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था पर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें शीर्ष अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
Anubhav Dubey 
