अमित भटनागर का आमरण अनशन 7वें दिन जारी, चिता आंदोलन का 10वां दिन

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का चिता आंदोलन 10वें दिन भी जारी है। अमित भटनागर के आमरण अनशन का सातवां दिन है।

अमित भटनागर का आमरण अनशन 7वें दिन जारी, चिता आंदोलन का 10वां दिन

छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत मझगांव, रूंझ, नैगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा ‘चिता आंदोलन’ दसवें दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन सातवें दिन में प्रवेश कर गया है। संगठन का दावा है कि अनशन के कारण भटनागर का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है और उनका वजन करीब 5 किलोग्राम कम हो गया है।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि खराब मौसम और कथित प्रशासनिक दबाव के बावजूद आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। आंदोलन के दसवें दिन भी मिट्टी सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह जारी रहा। प्रदर्शनकारी परियोजना प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा और कथित भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराने का आरोप

जय किसान संगठन का आरोप है कि आमरण अनशन के सात दिन बीतने के बावजूद प्रशासन की ओर से अमित भटनागर का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया। संगठन के मुताबिक उनका स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है। हालांकि, वजन घटने और स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि सामने नहीं आई है।

प्रशासन के दावे पर अमित भटनागर ने उठाए सवाल

अमित भटनागर ने प्रशासन के उस कथित दावे पर सवाल उठाए हैं, जिसमें आंदोलन स्थल पर केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित लोगों की मौजूदगी नहीं होने की बात कही गई थी। भटनागर ने बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ एक वीडियो जारी कर दावा किया कि परियोजना प्रभावित लोग पिछले दस दिनों से आंदोलन स्थल पर मौजूद हैं।

उनका आरोप है कि कई प्रभावित परिवारों के घर और मकान तोड़े गए तथा जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन कुछ परिवारों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। भटनागर ने इसे भू-अर्जन कानून 2013 की धारा 38(1) और 38(2) का उल्लंघन बताया है। उन्होंने खरियानी गांव के स्कूल को तोड़े जाने पर भी सवाल उठाए।

मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप

अमित भटनागर ने परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और मुआवजा वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कुछ अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल कर उन्हें मुआवजा दिया गया, जबकि वास्तविक प्रभावित परिवारों को नजरअंदाज किया गया। इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन या परियोजना प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

कई महिला-पुरुष भी क्रमिक अनशन पर

अमित भटनागर के आमरण अनशन के साथ सोमरनी आदिवासी, रामकली आदिवासी, हरवाई आदिवासी, पानबाई आदिवासी, कलावती आदिवासी, चम्पा आदिवासी, मझली बहू आदिवासी, अंगी बाई आदिवासी, अगना बाई आदिवासी, आशा आदिवासी, रानी आदिवासी और चंदा आदिवासी सहित कई महिला-पुरुष क्रमिक अनशन में शामिल हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि सभी विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा मिलने और कथित भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा।