MP: SIR के बाद 42.74 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटे, वेबसाइट पर तकनीकी खामी से बढ़ी परेशानी
चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश में SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की। राज्य की वोटर लिस्ट में से 42.74 लाख नाम हटाए गए। इनमें 19.19 लाख पुरुष और 23.64 लाख महिलाएं हैं। इसके अलावा 8.40 लाख नाम ऐसे हैं, जिनकी मैपिंग नहीं हुई है।
भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मध्य प्रदेश में कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट मंगलवार 23 दिसंबर को जारी कर की गई। ड्राफ्ट सूची के अनुसार प्रदेश की मतदाता सूची से कुल 42,74,160 नाम हटाए गए हैं। इनमें 19.19 लाख पुरुष, 23.64 लाख महिलाएं शामिल हैं, जबकि 8.40 लाख नाम ऐसे हैं जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी है। इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों से लेकर आम मतदाताओं तक में हलचल मच गई है।
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर तकनीकी समस्याएं
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही चुनाव आयोग की वेबसाइट पर तकनीकी समस्याएं सामने आईं। मतदाताओं ने शिकायत की कि EPIC नंबर डालने पर कैप्चा तो आ रहा है, लेकिन सब्मिट करने के बाद वोटर डिटेल नहीं खुल रही। बार-बार कैप्चा रिफ्रेश हो रहा है, जिससे EPIC नंबर के जरिए नाम खोजना मुश्किल हो गया। हालांकि, मोबाइल नंबर से सर्च करने पर वोटर डिटेल खुल रही है, लेकिन इसमें भी एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कुछ मामलों में मोबाइल नंबर डालने पर केरल और छत्तीसगढ़ जैसे अन्य राज्यों की वोटर लिस्ट दिखाई दे रही है, जिससे डेटा मैपिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यह अभियान पूरी तरह पारदर्शी - चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने इन आरोपों और आशंकाओं के बीच SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि यह अभियान पूरी तरह पारदर्शी और समावेशी रहा है। आयोग के मुताबिक, राज्य में कुल 5 करोड़ 74 लाख से अधिक मतदाताओं में से 5 करोड़ 31 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा किए, जो व्यापक जनभागीदारी को दर्शाता है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रदेश के 55 जिलों, 230 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), 532 सहायक ERO, और 65,014 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने समन्वय के साथ काम किया। BLO के साथ स्वयंसेवकों ने भी घर-घर जाकर संपर्क किया।
आयोग ने यह भी बताया कि सभी छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रक्रिया में शामिल किया गया। दलों ने 1,35,882 बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए, जिन्हें BLO के साथ समन्वय कर काम करने की अनुमति दी गई। बीएलए को प्रतिदिन अधिकतम 50 गणना प्रपत्र जमा करने की छूट दी गई, ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। आयोग के अनुसार, BLO ने प्रत्येक मतदाता से कम से कम तीन बार संपर्क किया।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अंतिम नहीं- चुनाव आयोग
चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अंतिम नहीं है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं या जिनकी जानकारी गलत है, उन्हें आपत्ति और दावा दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपना नाम ड्राफ्ट सूची में जांचें और यदि कोई त्रुटि हो तो निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार कराएं।
हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने और वेबसाइट की तकनीकी खामियों ने SIR प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन समस्याओं को कितनी जल्दी दूर करता है और अंतिम वोटर लिस्ट में कितने नाम दोबारा जोड़े जाते हैं।
Varsha Shrivastava 
