मैहर: रानी दुर्गावती कन्या छात्रावास में भोजन संकट, चूल्हे पर खाना बनाती छात्राओं का वीडियो वायरल
मैहर जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या छात्रावास दो महीने से भोजन व्यवस्था ठप, छात्राओं का चूल्हे पर खाना बनाने का वीडियो वायरल होने के बाद अधीक्षिका के बाद जिला अधिकारी को भी नोटिस जारी
मैहर। जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या छात्रावास में पिछले दो महीनों से भोजन न मिलने और छात्राओं द्वारा चूल्हे पर खाना बनाने के मामले कार्रवाई की गई है। गुरुवार की दोपहर यह खबर सोशल मीडिया पर आने के एक घंटे के भीतर ही पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया।

मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी के कड़े निर्देश के बाद जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने तत्परता दिखाते हुए छात्रावास की अधीक्षिका पुष्पलता सिंह को तत्काल नोटिस थमाया। वहीं, गुरुवार की देर रात इस मामले में दोषी पाए गए जिला आदिम जाति कल्याण अधिकारी कमलेश शुक्ला को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब छात्रावास के भीतर का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में छात्राएं कड़ाके की धूप और गर्मी के बीच लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाती नजर आ रही थीं। वीडियो में अपनी व्यथा सुनाते हुए बीए फस्ट ईयर की छात्रा रोशनी दीपांकर ने आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से छात्रावास में भोजन की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है।

हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि छात्राओं को अपने घर से अनाज लाकर पेट भरना पड़ रहा है। छात्राओं का कहना था कि उनका पढ़ाई का कीमती समय चूल्हे पर खाना पकाने और उसकी व्यवस्था करने में ही बर्बाद हो रहा था। बेबस छात्राओं ने वीडियो जारी कर शासन और प्रशासन से भोजन की समुचित व्यवस्था कराने की गुहार लगाई थी।
सीईओ ने वीडियो कॉल पर जाना छात्राओं का हाल
जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने खबर का संज्ञान लेते हुए न केवल नोटिस जारी किया, बल्कि पीड़ित छात्रा रोशनी दीपांकर से सीधे वीडियो कॉल पर बात कर पूरे छात्रावास का हाल जाना। सीईओ ने छात्रा को ढांढस बंधाते हुए कहा कि भविष्य में छात्रावास में किसी भी तरह की समस्या या परेशानी होती है, तो वे सीधे उन्हें अवगत कराएं।

लापरवाही पड़ी भारी, अधिकारियों के वेतन से होगी कटौती
खबर सामने आते ही प्रशासनिक टीम तुरंत मौके पर निरीक्षण करने पहुंची और छात्राओं के लिए भोजन की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई। प्रशासन द्वारा जारी सख्त नोटिस में साफ तौर पर निर्देशित किया गया है कि छात्रावास में भोजन व्यवस्था को तत्काल सुचारू रूप से संपादित कराया जाए।

इसके साथ ही भोजन न मिलने के कारण अब तक बच्चों द्वारा अपने पास से व्यय की गई राशि को वापस लौटाना सुनिश्चित करें। यदि समय रहते बच्चों की राशि नहीं लौटाई गई, तो यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटकर पीड़ित छात्राओं को प्रदाय की जाएगी, जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
Varsha Shrivastava 
