भोपाल निगम परिषद में हंगामा: ‘मैं कमीशन नहीं लेती’ बोलीं नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, भाजपा पार्षदों ने घेरी अध्यक्ष की आसंदी

भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में छुट्टी के दिन सम्मेलन बुलाने पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई। 12 एल्डरमैन का परिचय, होर्डिंग्स, सड़कें, पार्किंग और 493.49 करोड़ के अमृत 2.0 ऋण प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

भोपाल निगम परिषद में हंगामा: ‘मैं कमीशन नहीं लेती’ बोलीं नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, भाजपा पार्षदों ने घेरी अध्यक्ष की आसंदी

Bhopal Nagar Nigam: भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक शनिवार को हंगामे और तीखी बहस के बीच हुई। आईएसबीटी स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक के दौरान न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के हॉल को किराए पर देने के प्रस्ताव पर विवाद हो गया। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के ‘मैं कमीशन नहीं लेती’ कहने पर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई और अध्यक्ष की आसंदी घेर ली। हंगामा बढ़ने पर सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने नेता प्रतिपक्ष से अपने शब्दों के लिए माफी मांगने और उन्हें कार्यवाही से विलोपित करने की बात कही। हालांकि, शबिस्ता जकी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि अपने बारे में कहा था कि वह कमीशन नहीं लेतीं। कांग्रेस पार्षदों ने भी उनका समर्थन किया और भाजपा पर बात को बढ़ाने का आरोप लगाया।

ऑडिट आपत्तियों के बाद भुगतान पर भी सवाल

बैठक में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में विभागों में ऑडिट आपत्तियों के बावजूद भुगतान किए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि ऑडिट आपत्तियों की जानकारी अभी उनके पास नहीं आई है। जानकारी मिलने पर उसे उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित भुगतान ऑडिट के बाद ही किए गए हैं।

जकी ने एमआईसी के जवाब पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि आपत्ति का 45 दिनों के भीतर निराकरण किया जाना चाहिए।

प्रावधानिक बजट के आंकड़ों पर सवाल-जवाब

प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रावधानिक बजट में किए गए कार्यों की जानकारी मांगी। इस पर एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने कहा कि बजट की राशि 108 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि 3,938.45 करोड़ रुपये है। बैठक में इस मुद्दे पर भी जवाब-तलब हुआ।

नगर निगम परिषद की बैठक में कुल 13 प्रश्नों पर चर्चा होनी थी। पार्षदों ने शहर के विकास कार्यों, निगम की आय और विभिन्न विभागों के कामकाज से जुड़े सवाल उठाए।

85 वार्डों में 95 दिशा-सूचक बोर्ड, विज्ञापन से आय का मुद्दा उठा

कांग्रेस पार्षद नसीम गफूर ने शहर में लगाए गए दिशा-सूचक बोर्डों और उन पर विज्ञापन के लिए वसूले जाने वाले शुल्क का मुद्दा उठाया। जवाब में एमआईसी सदस्य जगदीश यादव ने बताया कि नगर निगम ने 85 वार्डों में 95 साइन बोर्ड लगाए हैं। इन बोर्डों के आधे हिस्से में विज्ञापन की अनुमति दी गई है।

यादव के मुताबिक, नगर निगम को चालू वित्तीय वर्ष में इससे 6.79 करोड़ रुपये का शुल्क मिला है। उन्होंने करीब 15 करोड़ रुपये और मिलने की संभावना भी जताई।

इस पर नसीम गफूर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि दिशा-सूचक बोर्डों का इस्तेमाल जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए और उन पर विज्ञापन या पोस्टर नहीं लगाए जाने चाहिए।

मामले में अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने आयुक्त को निर्देश दिए कि दिशा-सूचक बोर्डों पर किसी भी तरह के बैनर-पोस्टर नहीं लगने चाहिए। यदि ऐसे बैनर-पोस्टर लगे हैं, तो नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाए।

सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर का प्रस्ताव वापस

बैठक में गर्ल्स कॉलेज के पास स्थित सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर को किराए पर देने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। इससे पहले छात्राओं की सुरक्षा को लेकर इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई गई थी।

संशोधित प्रस्ताव में परिसर और आसपास 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे चालू रखने तथा सुरक्षा गार्ड तैनात करने की शर्त रखी गई थी। इसके अलावा, तीन साल के किराए और अगले तीन साल के नवीनीकरण का प्रावधान भी शामिल था।

हालांकि, एमआईसी सदस्य जगदीश यादव ने कुछ संशोधन किए जाने की बात कहते हुए प्रस्ताव वापस ले लिया। इसके बाद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

अमृत 2.0 के 493.49 करोड़ रुपये के ऋण प्रस्ताव पर चर्चा

बैठक के एजेंडे में अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये के ऋण का प्रस्ताव भी शामिल था। एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने योजना के पक्ष में अपनी बात रखी और भाजपा पार्षदों ने भी इसका समर्थन किया।

वहीं, कांग्रेस पार्षदों ने बड़े तालाब में गंदगी मिलने और इसे रोकने में नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाए। पार्षदों ने तालाबों की सफाई और उनके संरक्षण से जुड़े कार्यों पर भी चिंता जताई।

पुराने शहर के तालाबों और ठेका कंपनी की जांच की मांग

पार्षद अजीजउद्दीन ने पुराने शहर के तालाबों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। उन्होंने संबंधित योजना को दूसरे विभाग को सौंपने का सुझाव दिया। पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और अशोक मारण ने भी आपत्तियां जताईं और ठेका कंपनी अंकिता कंस्ट्रक्शन से जुड़ी फाइल की जांच कराने की मांग की। पार्षद देवांशु कंसाना ने भी इस संबंध में सवाल उठाए।

नगर निगम परिषद की बैठक में वित्तीय जवाबदेही, विज्ञापन शुल्क, तालाबों की स्थिति और हॉकर्स कॉर्नर जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस देखने को मिली। बैठक के दौरान हुए हंगामे के बाद कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।