इंदौर के जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त: सूखे तालाबों में नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर मांगा जवाब
इंदौर में जल संकट और गिरते भूजल स्तर पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। सूखे तालाबों को नर्मदा के पानी से भरने, असरावद खुर्द तालाब तक पाइपलाइन बिछाने और जल वितरण व्यवस्था की निगरानी के प्रस्ताव पर सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
इंदौर। शहर में गहराते जल संकट और गिरते भूजल स्तर को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सूखे तालाबों को नर्मदा के पानी से भरने के प्रस्ताव पर अदालत ने राज्य शासन से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
जल संकट के समाधान के लिए याचिका दायर
दरअसल, इंदौर में जल संकट के स्थायी समाधान की मांग को लेकर राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। सुनवाई के दौरान असरावद खुर्द स्थित करीब 50 एकड़ में फैले ऐतिहासिक तालाब को दोबारा जल आपूर्ति से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत क्षिप्रा टेकरी से असरावद खुर्द तक करीब चार किलोमीटर लंबी अस्थायी पाइपलाइन बिछाकर नर्मदा का पानी पहुंचाने का सुझाव दिया गया है।
छोटी नहरों और मोहरियों की सफाई कराने की मांग
याचिका में शहर की जल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पानी की छोटी नहरों और मोहरियों की सफाई कराने की मांग भी की गई है। इसके अलावा टैंकरों और बोरवेल की निगरानी के लिए विशेष समिति गठित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि जल वितरण व्यवस्था पर नजर रखी जा सके।
याचिकाकर्ता की ओर से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी का उपयोग बागवानी और गाड़ियों की धुलाई जैसे कार्यों में करने पर भी जोर दिया गया है। इससे पीने योग्य पानी की खपत कम करने में मदद मिल सकती है।
अगली सुनवाई 17 नवंबर को
अब इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य शासन को दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। इस दौरान जल संकट के समाधान और तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

