MP OBC Reservation: SC में सुनवाई टली, MP सरकार की ओर से एक भी वकील सुनवाई में नहीं पहुंचा

27% ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली। गुरुवार को एमपी सरकार का एक भी वकील नहीं पहुंचा, जिस इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। अब अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।

MP OBC Reservation: SC में सुनवाई टली, MP सरकार की ओर से एक भी वकील सुनवाई में नहीं पहुंचा

27% ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। 29 जनवरी, गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की गंभीर लापरवाही सामने आई। अदालत में सरकार का पक्ष रखने के लिए एक भी अधिवक्ता नहीं पहुंचा, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी को की जाएगी। 

MP सरकार के वकील गायब, SC ने जताई नाराज़गी

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई नहीं हो पाई। इसकी वजह रही मध्य प्रदेश सरकार की लापरवाही। सरकार की तरफ से एक भी अधिवक्ता सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर आचरण बताया। वहीं, ओबीसी पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुरोध पर अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को तय की गई है।

 SC में ओबीसी आरक्षण का केस 6वें नंबर पर लिस्टेड 

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति नरसिंहा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रकरण सीरियल नंबर 106 पर अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे। जैसे ही कोर्ट ने इन मामलों को बुलाया, यह सामने आया कि राज्य सरकार की ओर से कोई भी वकील मौजूद नहीं है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब सरकार का पक्ष ही पेश नहीं होगा, तो सुनवाई कैसे आगे बढ़ाई जा सकती है।

ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जॉर्ज चौधरी ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित कुल छह वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त कर रखा है। इसके बावजूद सुनवाई के दिन एक भी वकील का कोर्ट में मौजूद न होना बेहद चिंताजनक है और इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

सरकार ने सभी मामलों को HC से SC में ट्रांसफर करवाया 

बता दें, कि राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवा दिया था। ओबीसी पक्ष का आरोप है कि 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के दबाव से बचने के लिए ऐसा किया गया। सरकार भले ही भर्ती विज्ञापनों में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रही हो, लेकिन नियमों के विरुद्ध करीब 13 प्रतिशत पदों को होल्ड कर लिया गया है, जिससे ओबीसी उम्मीदवारों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

एक और गौर करने वाली बात है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून पर न तो हाईकोर्ट ने कोई स्टे दिया है और न ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। इसके बावजूद सरकार पिछले एक साल से अधिक समय से केवल तारीख पर तारीख लेती आ रही है।