MP विधानसभा सत्र का तीसरा दिन: किसानों के मुद्दे पर विपक्ष का सदन से वॉकआउट

मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन की शुरुआत होते ही कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन के बाद सदन से वॉकआउट कर दिया।

MP विधानसभा सत्र का तीसरा दिन: किसानों के मुद्दे पर विपक्ष का सदन से वॉकआउट

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन की शुरुआत होते ही कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन के बाद सदन से वॉकआउट कर दिया। किसानों को मुआवजा भुगतान के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हुआ और कांग्रेस ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। विधानसभा के प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने आरोप लगाया कि शिवपुरी जिले के किसानों को वादा किए गए 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे का भुगतान अभी तक नहीं हुआ। कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने अतिवृष्टि से ग्वालियर जिले में किसानों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अतिवृष्टि से सिर्फ तीन किसानों का नुकसान बताया गया और सिर्फ 15000 रुपये का मुआवजा दिया गया। इस पर राजस्व मंत्री ने जवाब दिया कि 200 करोड़ रुपये किसानों को दिए जा चुके हैं। मंत्री के उत्तर से असंतुष्ट नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नुकसान का कुल आकलन 5 हजार करोड़ है, लेकिन सरकार ने सिर्फ 200 करोड़ रुपये दिए हैं। 

सदन के बाहर कांग्रेस ने किया नाटक-नुक्कड़

इसके पहले कांग्रेस ने सदन के बाहर जमकर हंगामा किया। कांग्रेस ने नाटक- नुक्कड़ के जरिए ‘बंदर के हाथ में उस्तरा’ वाली कहावत का संकेतिक प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि बंदर रूपी भाजपा सरकार के हाथ में उस्तरा आ गया है, जिससे वह युवाओं के रोजगार, स्वास्थ्य व्यवस्था, कानून व्यवस्था और किसानों के अधिकारों पर उस्तरा चला रही है। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में विधानसभा सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरोध में किया जोरदार प्रदर्शन।

रोजगार के लिए भटक रहा युवा: कांग्रेस

कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, पढ़े-लिखे युवकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। आज जो भी सरकारी पदों का सृजन हुआ है वह कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था और आज भी प्रदेश में काफी सरकारी पद खाली पड़े हैं, जिनको सरकार भर नहीं पा रही है। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि जहां प्रदेश में ब्लड टेस्ट एवं अन्य स्वास्थ्य जांचों में  घोटाला के साथ साथ स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी है इसके बावजूद भी 900 करोड रुपए का भुगतान किया गया।