कमलनाथ का सरकार पर हमला: MP का वेयरहाउसिंग सिस्टम बर्बाद

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में सरकारी वेयरहाउसिंग सिस्टम की लापरवाही और भुगतान रुकावट के कारण निवेशकों के करोड़ों रुपये फंसने को आर्थिक हत्या करार दिया।

कमलनाथ का सरकार पर हमला: MP का वेयरहाउसिंग सिस्टम बर्बाद

 भोपाल:पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार को एक बार फिर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने वेयरहाउसिंग सिस्टम को लेकर बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुवे लिखा कि मध्यप्रदेश का वेयरहाउसिंग सिस्टम पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।

 वेयरहाउस मालिकों के करोड़ों रुपये फंसें

प्रदेश में 81% वेयरहाउस खाली पड़े हैं। हजारों मालिक और निवेशक तीन-तीन साल से किराए का इंतजार कर रहे हैं। करोड़ों रुपये वेयरहाउस मालिकों के फंस चुके हैं और कई लोग बैंक की नजर में एनपीए घोषित कर दिए गए हैं। यह किसी प्राकृतिक कारण से नहीं हुआ, बल्कि सरकार की लापरवाही, भुगतान रोकने और कुप्रबंधन की वजह से हुआ है।

कर्ज के बोझ में दबते प्राइवेट वेयरहाउस मालिक : कमलनाथ

सरकार ने मार्कफेड, सिविल सप्लाई निगम और नेफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से निजी वेयरहाउस लिए, लेकिन किराया और भुगतान रोक दिया। लोगों ने सरकार पर भरोसा करके जमीन गिरवी रखकर करोड़ों के वेयरहाउस बनाए थे। अब तीन-तीन साल से पैसा न मिलने के कारण वे बैंक के कर्ज में डूब चुके हैं। कई मालिक अपने घर, जमीन और जेवर बेचकर EMI भर रहे हैं, और फिर भी कर्ज बढ़ता ही जा रहा है।

सरकारी वादे और वास्तविकता में बड़ा अंतर:पूर्व मुख्यमंत्री

पूरे प्रदेश में 8600 से अधिक वेयरहाउस हैं, जिनकी कुल क्षमता 4.20 करोड़ मीट्रिक टन है, लेकिन सरकार ने सिर्फ 79.57 लाख मीट्रिक टन का ही उपयोग किया। यानी सरकार ने गोदाम खाली छोड़ दिए, और जिन लोगों ने करोड़ों लगाकर यह व्यवस्था खड़ी की, उन्हें बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया। न भुगतान कर रही है, न गोदाम खाली कर रही है, और न कोई स्पष्ट नीति बना रही है।

सरकारी भरोसे वेयरहाउस मालिक कर्ज में डूबे

एक वेयरहाउस मालिक बताते हैं कि उन्होंने सरकार के भरोसे कर्ज लेकर बड़ा गोदाम बनाया। सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि पाँच साल तक लगातार भंडारण मिलेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि तीन साल से सरकार की तरफ से एक रुपया तक नहीं मिला। अब बैंक नीलामी की नोटिस भेज रहा है। यह स्थिति सरकार की नीतियों और गैरजिम्मेदारी का ज्वलंत उदाहरण है।दूसरे मालिक बताते हैं कि उनका आधा गोदाम खाली पड़ा है। जो हिस्सा भरा है, उसका भी किराया महीनों से नहीं मिला। किश्तें अटक गई हैं, कर्ज बढ़ गया है और उनका पूरा व्यवसाय ठप हो गया है। सरकार न तो वेयरहाउस खाली कर रही है, न भुगतान कर रही है और न समाधान बता रही है।

देश में भंडारण की जरूरत बढ़ रही

 आगे उन्होने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जब देश में भंडारण की जरूरत बढ़ रही है, तब मध्यप्रदेश में हजारों वेयरहाउस ताले डालकर खड़े हुए हैं। प्याज भंडारण का पैसा भी अटका है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान सरकार ने रोक रखा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक आर्थिक दुर्घटना है जिसे सरकार ने खुद पैदा किया है।सरकार से स्पष्ट सवाल उठते हैं। आखिर हजारों करोड़ रुपये का भुगतान क्यों नहीं किया गया? वेयरहाउस खाली क्यों रखे गए? भुगतान रोकने का फैसला किसने और क्यों लिया? और उन हजारों लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा जो सरकार पर भरोसा करके आज कर्ज में डूब चुके हैं?

कमलनाथ के आरोप आर्थिक हत्या: जनता जवाब मांग रही

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाकर सरकार तमाशा देख रही है। किसानों, व्यापारियों और वेयरहाउस मालिकों की मेहनत और पूंजी को नष्ट कर दिया गया है। यह प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सरकार द्वारा की गई आर्थिक हत्या है। जनता अब जवाब मांग रही है और सरकार को यह जवाब देना ही होगा।