भोपाल में स्लॉटर हाउस को लेकर सियासी घमासान तेज, करोड़ों की पेनल्टी माफी और जांच पर उठे सवाल
भोपाल स्लॉटर हाउस मामले में बड़ा विवाद, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अमित शर्मा ने ने लगाए गंभीर भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप।
भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अमित शर्मा ने भोपाल स्लॉटर हाउस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार, धार्मिक भावनाओं से जुड़ी संवेदनशीलता और शासन की जवाबदेही से संबंधित है।

अमित शर्मा ने दावा किया कि जहांगीराबाद स्थित मॉडर्न स्लॉटर हाउस से जुड़े मामले में करीब 26 टन गौमांस काटकर बेचने की बात सामने आई है, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक समुदाय से जुड़ा नहीं बल्कि पूरे समाज की भावनाओं और कानून व्यवस्था से संबंधित है।
MIC और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि नगर निगम (MIC) के अधिकारियों और सदस्यों ने इस मामले में अनभिज्ञता जताई, जबकि दस्तावेज कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। MIC सदस्य आर.के. सिंह ने भी कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि यह दावा दस्तावेजों के आधार पर गलत साबित होता है। अमित शर्मा ने दावा किया कि कई MIC सदस्यों और महापौर के हस्ताक्षर दस्तावेजों में मौजूद हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही है।

करोड़ों की पेनल्टी माफी का आरोप
कांग्रेस नेता ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये की पेनल्टी पहले लगाई गई और बाद में उसे माफ कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है और इसमें स्पष्ट रूप से नियमों की अनदेखी की गई है। अमित शर्मा ने कहा कि दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं और वास्तविक कार्रवाई को कमजोर किया गया। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला बताया।
अनुबंध विस्तार और प्रशासनिक फैसलों पर विवाद
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि 24 अक्टूबर 2025 की MIC बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 6 के तहत स्लॉटर हाउस के संचालन को 6 महीने के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन बाद में इसे संशोधित कर 20 वर्षों के अनुबंध में बदल दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि इस बदलाव के दौरान बिना पेनल्टी के अवधि बढ़ाई गई, जो गंभीर अनियमितता को दर्शाता है। इस फैसले पर भी अब सवाल उठ रहे हैं।

अमित शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जिस ट्रक में कथित तौर पर मांस पकड़ा गया था, वह अब कहां है और उसमें मिला मांस कहां गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी है और जांच एजेंसियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।
सरकार और नेताओं की चुप्पी पर सवाल
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर भी सवाल उठाए। अमित शर्मा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गौ संरक्षण और धार्मिक भावनाओं की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है, तो फिर भाजपा के बड़े नेता इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। उन्होंने खास तौर पर आलोक शर्मा, रामेश्वर शर्मा और विश्वास सारंग जैसे नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि यह स्थिति कई संदेह पैदा करती है।

कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। अमित शर्मा ने कहा कि एसआईटी जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और वास्तविक तथ्यों को सामने नहीं लाया जा रहा। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कई बड़े नाम और संरक्षणकर्ताओं की भूमिका सामने आ सकती है।
Varsha Shrivastava 
