वीरता पुरस्कार से सम्मानित MP कैडर के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी का इस्तीफा
मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने वीआरएस लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को जानकारी दी है
मध्य प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने केंद्र और राज्य सरकार को सूचित करते हुए स्वेच्छा से सेवा निवृत्ति (VRS) लेकर इस्तीफा दे दिया है। वह वर्तमान में दिल्ली में नेशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) में पदस्थ थे, जो नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के अंतर्गत आती है। अभिषेक तिवारी दो साल से दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर थे और इसके पहले उन्होंने मध्य प्रदेश में कई अहम पदों पर काम किया है।
वीरता पुरस्कार से हो चुके हैं सम्मानित
2013 बैच के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी की पुलिस सेवा में उल्लेखनीय योगदान रहा है। मध्य प्रदेश में बेहतर कामकाज के लिए उन्हें दो बार प्रेसिडेंट मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अलावा राज्य सरकार ने भी उन्हें कई बार विशेष कार्यों के लिए पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने सागर जिले में पुलिस अधीक्षक के तौर पर सेवाएं दीं और बालाघाट समेत अन्य जिलों में भी काम किया। एसपी रहे अभिषेक तिवारी को नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में पदस्थ रहते हुए वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार नक्सलियों से मुठभेड़ की दो अलग-अलग घटनाओं में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया गया था।
सागर से 9 बच्चों की मौत के बाद हटाए गए थे
हालांकि, उनका करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। 2024 में सागर जिले में एक दुखद घटना हुई, जब बारिश के दौरान एक दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत हो गई। इस घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सागर से हटा दिया गया और दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। उस समय उनके हटाए जाने की वजह प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने में कोई चूक बताई गई थी। इस्तीफा देने के पीछे मुख्य रूप से निजी कारण बताए जा रहे हैं। पुलिस विभाग के कई अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है कि उन्होंने व्यक्तिगत कार्यों के कारण वीआरएस लिया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनका भविष्य का करियर किस दिशा में जाएगा।
IPS के अचानक इस्तीफे से उठ रहे कई सवाल?
अभिषेक तिवारी का वीआरएस या इस्तीफा अभी कई स्तरों पर मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय और मध्य प्रदेश गृह विभाग की स्वीकृति अनिवार्य है। विभागीय रिपोर्ट और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही उनका वीआरएस पूरी तरह से औपचारिक रूप से मान्य होगा। दिल्ली में दो साल तक प्रतिनियुक्ति पर रहने के दौरान भी उन्होंने कई विशेष कार्यों में योगदान दिया। उनके इस्तीफे के बाद पुलिस विभाग में यह चर्चा जारी है कि आने वाले समय में उनके अनुभव और योगदान को किस रूप में उपयोग किया जा सकता है। अभिषेक तिवारी की पुलिस सेवा में उपलब्धियां और विवाद दोनों ही उनके करियर की विशेष पहचान हैं। प्रेसिडेंट मेडल और अन्य पुरस्कार उनके कार्यकुशलता का प्रमाण हैं, जबकि सागर में हुई दुर्घटना और उसके बाद हटाए जाने की घटना उनके करियर के विवादास्पद हिस्से के रूप में सामने आई।
Varsha Shrivastava 
