दतिया उपचुनाव: कांग्रेस में बदले समीकरण! राजेंद्र भारती बोले- मेरे परिवार को नहीं, किसी और को टिकट दे दीजिए

दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 से पहले कांग्रेस में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने हाईकमान से कहा कि उनके परिवार के बजाय किसी अन्य योग्य नेता को उम्मीदवार बनाया जाए। जानिए पूरी राजनीतिक तस्वीर और उपचुनाव की वजह।

दतिया उपचुनाव: कांग्रेस में बदले समीकरण! राजेंद्र भारती बोले- मेरे परिवार को नहीं, किसी और को टिकट दे दीजिए

दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक मोड़ आ गया है। मतदान 30 जुलाई को होना है और नामांकन की आखिरी तारीख 13 जुलाई है, लेकिन अब तक न भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है और न ही कांग्रेस ने। इसी बीच कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

राजेंद्र भारती ने पार्टी हाईकमान से साफ कहा है कि अगर कांग्रेस चाहे तो उनके परिवार के किसी सदस्य को टिकट देने की जरूरत नहीं है। पार्टी किसी दूसरे योग्य नेता को उम्मीदवार बनाए, उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस जिस भी उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, वे उसके साथ पूरी ताकत से खड़े रहेंगे और जीत दिलाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे।

मीडिया रिपोर्टस की माने तो राजेंद्र भारती ने कहा कि अब फैसला पूरी तरह पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है। उनका कहना था कि उनका चुनाव लड़ना जरूरी नहीं है। अगर पार्टी को उनसे बेहतर उम्मीदवार मिलता है तो उसे टिकट दिया जाए, वे तन, मन और धन से उसका साथ देंगे।

अब इन दो नेताओं के नाम सबसे आगे

राजेंद्र भारती के इस बयान के बाद कांग्रेस में अब दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पहला नाम पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक का है और दूसरा नाम दतिया से दो बार विधायक रह चुके घनश्याम सिंह का।

दिलचस्प बात यह है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले अवधेश नायक को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन राजेंद्र भारती समर्थकों के विरोध के बाद पार्टी ने फैसला बदलते हुए टिकट राजेंद्र भारती को दे दिया था।

क्या यह एक राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है?

राजनीतिक जानकार इस बयान को सिर्फ त्याग की भावना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस में टिकट को लेकर कई दावेदार हैं। ऐसे में राजेंद्र भारती का यह बयान पार्टी के अंदर विरोध कम करने और अपनी सकारात्मक छवि बनाए रखने की कोशिश भी हो सकता है।

हालांकि राजेंद्र भारती सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि पार्टी जिस किसी को भी उम्मीदवार बनाएगी, वे उसका पूरा समर्थन करेंगे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक यह भी याद दिलाते हैं कि पहले टिकट नहीं मिलने पर वे दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं और समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक भी रह चुके हैं।

भाजपा ने भी नहीं खोले पत्ते

दूसरी ओर भाजपा ने भी अब तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

दतिया सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?

दतिया विधानसभा सीट इसलिए खाली हुई क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई थी।

दरअसल, साल 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। आरोप था कि बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई। इसी आधार पर कई वर्षों तक ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संस्था के ट्रस्टी थे।

करीब 28 साल पुराने इसी मामले में 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया। अगले दिन यानी 2 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें 3 साल की सजा और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

इसलिए चली गई विधायकी

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) और सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के मुताबिक, किसी विधायक को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर उसकी सदस्यता तुरंत खत्म हो जाती है। यही वजह रही कि 2 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त करते हुए दतिया सीट रिक्त घोषित कर दी और इसकी जानकारी चुनाव आयोग को भेज दी।

अब इसी खाली सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। कांग्रेस और भाजपा दोनों के उम्मीदवारों का ऐलान होना बाकी है। ऐसे में दतिया का यह उपचुनाव आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में से एक माना जा रहा है।