रीवा में 3 साल में कई डिग्रियां लेने का मामला, मेनिका पाण्डेय पर सवाल

रीवा में मेनिका पाण्डेय नाम की एक छात्रा ने 3 साल के अंदर अलग-अलग यूनिवर्सिटी से कई डिग्रियां ले लीं, जिसके बाद इन्हीं डिग्रियों के आधार पर उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पंजीयन कराया।

रीवा में 3 साल में कई डिग्रियां लेने का मामला, मेनिका पाण्डेय पर सवाल
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रीवा में शिक्षा से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां मेनिका पाण्डेय पर आरोप है कि उन्होंने एक ही समय में अलग-अलग यूनिवर्सिटी से कई डिग्रियां लेकर नियमों का उल्लंघन किया। मिली जानकारी के अनुसार, मेनिका पाण्डेय साल 2012 से 2015 के बीच रीवा के विधि महाविद्यालय में एलएलबी की रेगुलर छात्रा थीं। उनका एडमिशन अवधेश प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी, रीवा से माइग्रेशन के आधार पर हुआ था।

लेकिन इसी दौरान, यानी 2013-14 में उन्होंने कटनी स्थित महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय से पीजीडीसीए की डिग्री भी हासिल कर ली। आरोप ये भी है कि इसी समय उन्होंने डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए एम.कॉम. की पढ़ाई भी पूरी कर ली। मामला यहीं खत्म नहीं होता। सितंबर 2015 में उन्होंने रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय से एम.फिल की डिग्री भी ले ली। यानी जून 2014 से सितंबर 2015 के बीच उन्होंने कई डिग्रियां हासिल कर लीं, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं।

नियमों के मुताबिक, कोई भी छात्र एक ही समय में अलग-अलग यूनिवर्सिटी में रेगुलर तौर पर दाखिला लेकर पढ़ाई नहीं कर सकता, जब तक कि वह सही प्रक्रिया (जैसे माइग्रेशन) का पालन न करे। ऐसे में आरोप है कि मेनिका पाण्डेय ने जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया और संस्थानों को गुमराह किया।

बताया जा रहा है कि इन्हीं डिग्रियों के आधार पर उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग में गेस्ट फैकल्टी (अतिथि विद्वान) के रूप में पंजीयन कराया। इसके बाद से वह साल 2016 से रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय के बी.कॉम. (सीए) विभाग में पढ़ा रही हैं।

इतना ही नहीं, उन्होंने साल 2019 में पीएचडी के लिए भी रजिस्ट्रेशन कराया है। अब इस पूरे मामले को लेकर शिकायत की गई है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि एक गंभीर आपराधिक मामला भी बन सकता है।