राज्यसभा में दिग्विजय सिंह का संदेश, बोले-राजनीति में अभी लंबी पारी बाकी
दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में विदाई भाषण के दौरान साफ किया कि उनका राजनीतिक सफर जारी रहेगा। उन्होंने लोकतंत्र में संवाद, आपसी सम्मान और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया।
भोपाल/नई दिल्ली: राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों की विदाई के बीच दिग्विजय सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि उनका राजनीतिक सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियां याद करते हुए कहा कि वे न थके हैं और न ही रिटायर हुए हैं, बल्कि आगे भी सक्रिय रहेंगे।
22 साल में अध्यक्ष से मुख्यमंत्री तक का सफर
दिग्विजय सिंह ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि छात्र जीवन में राजनीति से उनका खास जुड़ाव नहीं था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें 22 साल की उम्र में नगर पालिका अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद वह 30 साल में विधायक, 33 में मंत्री और 46 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने हमेशा अपनी विचारधारा को प्राथमिकता दी।
राजनीति में मतभेद, लेकिन रिश्तों में मधुरता
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्होंने कभी किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रखी। राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर जैसे नेताओं के साथ काम करने के अनुभव को उन्होंने अपनी सीख बताया। साथ ही अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची हो तो उन्होंने खेद भी जताया।
संवाद और सौहार्द पर दिया जोर
दिग्विजय सिंह ने लोकतंत्र में संवाद की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने समाज में बढ़ती कटुता और साम्प्रदायिक तनाव पर चिंता जताई, और कहा कि यह देश की संस्कृति, लोकतंत्र और संविधान के लिए सही नहीं है। अपने संबोधन का समापन उन्होंने संत कबीरदास के संदेश के साथ करते हुए सभी के लिए भलाई की कामना की।
sanjay patidar 
