ट्विशा केस में गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर सकती है CBI, रिटायर्ड जज की अग्रिम जमानत MP HC ने रद्द की
भोपाल ट्विशा शर्मा केस: पोस्टमॉर्टम और सबूतों को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है।
भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI गिरिबाला को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए रिटायर्ड जज की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। यह मामला 12 मई की रात हुई संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरी थी।

हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध सबूतों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट का अग्रिम जमानत देना उचित नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि केस डायरी और मेडिकल साक्ष्यों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया।

वहीं, इस मामले में ट्विशा के आरोपी पति समर्थ सिंह को अदालत में पेश करने के बाद सीबीआई ने अपनी हिरासत में ले लिया है। कोर्ट ने उसे 29 मई तक सीबीआई रिमांड पर भेजा है। इसके बाद एजेंसी उससे लगातार पूछताछ कर रही है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में
Madhya Pradesh High Court ने अपने 17 पन्नों के आदेश में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि:
- मृतका के शरीर पर फांसी के अलावा भी कई चोटों के निशान मिले हैं
- ये चोटें केवल शव नीचे उतारने से नहीं हो सकतीं
- आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया
- ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और सबूतों पर पर्याप्त विचार नहीं किया
- मामला गंभीर है और गहन जांच की जरूरत है
कोर्ट ने यह भी कहा कि अग्रिम जमानत केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं पाया गया।

मायके के आरोप, ससुराल पक्ष की दलील
मृतका ट्विशा शर्मा के परिवार का आरोप है कि उसे लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी। परिवार ने दावा किया कि ससुराल पक्ष पर दहेज मांगने और गर्भपात के लिए दबाव बनाने के आरोप सामने आए हैं। परिवार के अनुसार, ट्विशा ने कई बार अपने मायके में आने की इच्छा जताई थी और मानसिक तनाव की जानकारी दी थी। व्हाट्सऐप चैट्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में अहम माना जा रहा है।

वहीं आरोपी पक्ष का कहना है कि यह मामला आत्महत्या का है। उनका दावा है कि घटना के तुरंत बाद ट्विशा को अस्पताल ले जाया गया था और पुलिस ने उसी दिन मोबाइल और DVR जब्त कर लिए थे। उनका यह भी कहना है कि व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य आरोप पति पर हैं, सास पर नहीं। साथ ही उन्होंने अग्रिम जमानत रद्द करने के फैसले को गलत बताया है।
जांच एजेंसी को गिरफ्तारी और पूछताछ की पूरी छूट
इस पूरे मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation को सौंप दी गई है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब जांच एजेंसी को गिरफ्तारी और पूछताछ की पूरी छूट मिल गई है।
CBI अब कई अहम बिंदुओं पर जांच कर रही है, जिनमें शामिल हैं:
- घटना वाली रात का पूरा घटनाक्रम
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और चोटों की प्रकृति
- मोबाइल, चैट्स और डिजिटल सबूत
- CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड
- परिवार और गवाहों के बयान
- पति समर्थ सिंह CBI रिमांड पर
इस मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह को भी CBI ने हिरासत में लिया है। कोर्ट ने उन्हें 29 मई तक CBI रिमांड पर भेजा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 12 मई की रात आखिर क्या हुआ था, घटना के बाद उनकी गतिविधियां क्या थीं और किन लोगों से संपर्क में थे।

आरोपियों पर गंभीर आरोप, आगे क्या हो सकता है
कोर्ट में पेश दलीलों में यह भी सामने आया कि आरोपी पक्ष पर आरोप है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और मीडिया में बयान देकर मृतका की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की। वहीं परिवार पक्ष का कहना है कि यह केवल आत्महत्या नहीं हो सकती, क्योंकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो अलग कहानी बताते हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। आगे ये संभावनाएं हैं:
- CBI द्वारा गिरफ्तारी की कार्रवाई
- विस्तृत पूछताछ और सबूतों की जांच
- नए गवाहों के बयान दर्ज होना
- डिजिटल और फॉरेंसिक जांच का विस्तार
- चार्जशीट दाखिल होने की प्रक्रिया
साथ ही आरोपी पक्ष के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी खुला है।
Varsha Shrivastava 
