जाति प्रमाण पत्र मामले में मंत्री प्रतिमा बागरी की सुनवाई पूरी, अब छानबीन समिति करेगी फैसला
प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र विवाद: छानबीन समिति के सामने शिकायतकर्ता और मंत्री ने रखा पक्ष, अहिरवार ने 1950 और 1977 के गजट का हवाला देते हुए दस्तावेज सौंपे
भोपाल। मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में 6 जुलाई सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई पूरी हो गई। एससी मामलों की छानबीन समिति के समक्ष लगभग एक घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अब समिति द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
शिकायतकर्ता ने पेश किए ऐतिहासिक दस्तावेज
मामले में शिकायतकर्ता और कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के सामने अपने पक्ष में कई दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने 1950 के गजट और 1977 के मध्य प्रदेश गजट का हवाला देते हुए दावा किया कि बागरी समुदाय की स्थिति को लेकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड में अलग-अलग उल्लेख मिलता है।
अहिरवार का आरोप है कि 1977 की अधिसूचना के बाद कुछ उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया, जबकि कुछ को अन्य वर्गों में रखा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्री का परिवार मूल रूप से राजपूत वर्ग से संबंधित रहा है और बाद में अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज किया गया।
मंत्री प्रतिमा बागरी ने आरोपों को बताया राजनीतिक
दूसरी ओर, मंत्री प्रतिमा बागरी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक प्रेरित बताया। उन्होंने समिति के सामने कहा कि विपक्ष अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाली महिला के मंत्री बनने को स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
प्रतिमा बागरी ने यह भी तर्क दिया कि 1950 में मध्य प्रदेश राज्य का गठन ही नहीं हुआ था, इसलिए उस समय की अधिसूचनाओं के आधार पर उठाए जा रहे सवालों का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने अपने समर्थन में कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।
दोनों ने रखा पक्ष, छानबीन समिति करेगी आगे की जांच
दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेज सुनने के बाद अब एससी मामलों की छानबीन समिति इन सभी तथ्यों का परीक्षण करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है और सभी की नजरें समिति के फैसले पर टिकी हैं।
Varsha Shrivastava 
