विदिशा: सिरोंज में वन विभाग की 1700 बीघा जमीन पर कब्जा, सड़क किनारे ट्रैक्टर से हो रही खेती; विधायक ने अधिकारियों पर उठाए सवाल

विदिशा के सिरोंज में वन विभाग की 1700 बीघा जमीन पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है. विधायक उमाकांत शर्मा ने अधिकारियों पर सवाल उठाए, जबकि SDO फॉरेस्ट ने संयुक्त कार्रवाई की बात कही.

विदिशा: सिरोंज में वन विभाग की 1700 बीघा जमीन पर कब्जा, सड़क किनारे ट्रैक्टर से हो रही खेती; विधायक ने अधिकारियों पर उठाए सवाल

Vidisha News: मध्य प्रदेश के विदिशा के सिरोंज क्षेत्र में वन विभाग की करीब 1700 बीघा सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है. सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए वन विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद प्रतिबंधित वन भूमि पर खुलेआम खेती होना गंभीर लापरवाही है, जिससे सरकार की छवि भी खराब होती है.

विधायक ने संयुक्त सीमांकन की मांग की

सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में विधायक उमाकांत शर्मा ने लटेरी, मुरवास और बलरामपुर के जंगलों में बढ़ते अतिक्रमण का मुद्दा उठाया. उन्होंने वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर वन भूमि का सीमांकन कराने और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की. विधायक ने कहा कि अधिकारियों की कथित साठगांठ और लापरवाही के कारण सरकारी जमीन पर लगातार कब्जे हो रहे हैं. ऐसे मामलों से न केवल वन विभाग बल्कि राज्य सरकार की भी बदनामी होती है.

सड़क किनारे 1700 बीघा वन भूमि पर खेती

मामला सिरोंज-लटेरी हाईवे क्रमांक-752 बी पर स्थित बलरामपुर और रूसिया गांव के पास का है. यहां कम्पार्टमेंट P-469 और P-470 की करीब 1700 बीघा वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती किए जाने का आरोप है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह जमीन मुख्य सड़क के किनारे स्थित है, जहां से रोजाना वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी गुजरते हैं. इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.

'असाड़ी उगाने' के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ता फकीर मोहम्मद ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि हर साल आषाढ़ के महीने में बोवनी के समय किसानों से 3 से 5 हजार रुपये प्रति बीघा तक कथित रूप से रिश्वत लेकर वन भूमि पर खेती करने की मौखिक अनुमति दी जाती है. स्थानीय स्तर पर इस व्यवस्था को 'असाड़ी उगाना' कहा जाता है. आरोप है कि पैसे लेने के बाद विभाग पूरे साल अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता.

नए कब्जों के लिए अलग रेट होने का भी आरोप

फकीर मोहम्मद का आरोप है कि पहले से कब्जा की गई जमीन के अलावा यदि कोई नया जंगल काटकर खेती करना चाहता है, तो उसके लिए कथित रिश्वत की दरें और अधिक होती हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में पदस्थ कुछ वनकर्मी स्थानीय होने के कारण अतिक्रमण को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में भी याचिकाएं दायर करने की जानकारी दी है.

SDO फॉरेस्ट बोले- अकेले वन विभाग नहीं हटा सकता अतिक्रमण

मामले पर SDO फॉरेस्ट प्रशांत सांकरे ने स्वीकार किया कि यह बड़े स्तर का अतिक्रमण है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना अकेले वन विभाग के लिए संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि जल्द ही राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा और अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी.