देशभर में एक साथ करोड़ों मोबाइल पर बज उठा इमरजेंसी अलर्ट सायरन!
देशभर में करोड़ों मोबाइल फोन पर सायरन के साथ इमरजेंसी अलर्ट मैसेज आया। NDMA ने 2 मई को सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की टेस्टिंग की, ताकि आपदा के समय रियल-टाइम सूचना लोगों तक पहुंचाई जा सके।
सुबह 11:45 बजे पूरे देश में एक साथ करोड़ों मोबाइल फोनों पर जोरदार सायरन की आवाज गूंजी। स्क्रीन पर अचानक इमरजेंसी अलर्ट मैसेज फ्लैश हो गया। कई लोग घबरा गए तो कुछ कन्फ्यूज भी हो गए। दरअसल, यह कोई असली आपदा नहीं थी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा सेल ब्रॉडकास्ट (Cell Broadcast) तकनीक का सफल परीक्षण किया जा रहा था।
क्या था यह अलर्ट..
NDMA ने आज पूरे देश के सभी राज्यों की राजधानियों और दिल्ली-NCR सहित पूरे भारत में एक साथ Emergency Alert System का ट्रायल किया। अलर्ट हिंदी, अंग्रेजी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भेजा गया। मैसेज में साफ लिखा था कि यह केवल परीक्षण है और किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।
भारत सरकार ने देशभर में मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का परीक्षण किया। इस दौरान लोगों के फोन पर तेज आवाज के साथ अलर्ट मैसेज भेजा गया। यह एक टेस्ट था, असली आपात स्थिति नहीं थी। इस सिस्टम का मकसद आपदा के समय तुरंत जानकारी पहुंचाना है। #alert pic.twitter.com/KGu9pdg8zY
— Public Vani News (@publicvaninews) May 2, 2026
सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक की खासियत..
SMS की तुलना में यह तकनीक ज्यादा तेज और प्रभावी है।
चुने गए इलाके में सभी एक्टिव मोबाइल फोनों पर एक साथ अलर्ट पहुंचता है।
इंटरनेट या मोबाइल डेटा की जरूरत नहीं पड़ती।
आपदा के समय रियल-टाइम चेतावनी देने में बेहद उपयोगी।
SACHET सिस्टम..
भारत में बना स्वदेशी समाधान, यह पूरा सिस्टम C-DOT (Centre for Development of Telematics) द्वारा विकसित Integrated Alert System 'SACHET' पर आधारित है। यह कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर काम करता है और देश के सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय कर दिया गया है। सरकार ने दो दिन पहले ही लोगों से अपील की थी कि परीक्षण वाला मैसेज आने पर घबराएं नहीं।

क्यों जरूरी है यह सिस्टम..
भविष्य में बाढ़, भूकंप, चक्रवात या किसी अन्य बड़े आपदा के समय लोगों तक तुरंत और सटीक सूचना पहुंचाने के लिए यह तकनीक बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। NDMA के इस सफल ट्रायल को देशभर में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। यह परीक्षण भविष्य में आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

