शिक्षा के मंदिर में डाका स्कूल का टीनशेड चोरी कर ले गए बदमाश

शिक्षा के मंदिर में डाका,भ्रष्टाचार की छत पर लगी चोरों की नजर, स्कूल का टीनशेड चोरी कर ले गए बदमाश चोरी से घपला उजागर,भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा था,शौचालय कागजों में छतदार शौचालय, जमीन पर टीन का लगा था छप्पर, गबन भी, चोरी भी, किस पर होगी कार्रवाई?

शिक्षा के मंदिर में डाका स्कूल का टीनशेड चोरी कर ले गए बदमाश

राजेंद्र पयासी मऊगंज: जिले में सबको शिक्षा अच्छी शिक्षा के दावों की हवा उस समय निकल गई जब नईगढ़ी जनपद शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक विद्यालय बर्रोहा में बीती रात चोरों ने शौचालय का पूरा टीन सेट उखाड़ लिया। यह चोरी सामान्य घटना नहीं है। यह उस व्यवस्था पर तमाचा है जहां पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने बच्चों के लिए बनने वाले शौचालय में लाखों का घपला किया और अब असुरक्षित ढांचे को बदमाशों ने निशाना बना लिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यशैली और जवाबदेही को लेकर आक्रोश है।जानकारी के अनुसार शासन द्वारा स्वच्छ भारत मिशन और समग्र शिक्षा के तहत स्कूल में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग पक्के छतदार शौचालय स्वीकृत किए गए थे। नियम के मुताबिक इसमें ईंट, सीमेंट,  पक्का छत और दरवाजे लगने थे। लेकिन आरोप है कि उप यंत्री, विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारी और अन्य जिम्मेदारों ने मिलीभगत कर सरकारी राशि का बंदरबांट कर लिया।


जमीनी हकीकत परख करने पर सामने आया कि पक्का भवन बनाने की जगह स्कूल की पुरानी दीवार से सटाकर एक तरफ दीवार खड़ी की गई। ऊपर से सस्ता और हल्का टीन सेट डालकर खानापूर्ति कर दी गई। न नींव मजबूत थी, न निर्माण मानक के अनुरूप। ग्रामीणों ने निर्माण के समय ही इसकी शिकायत की थी, लेकिन उनकी आवाज अनसुनी कर दी गई।  नतीजा यह हुआ कि जो शौचालय बच्चों की सुरक्षा और गरिमा के लिए बनना था, वह खुद असुरक्षित हो गया। अब उसी कमजोर ढांचे का टीन सेट चोर ले गए। इससे स्पष्ट है कि निर्माण के दिन से ही यह शौचालय भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ा था। सवाल यह है कि वर्क पूरा होने के बाद किसने इसका भौतिक सत्यापन किया और भुगतान किस आधार पर किया गया?

सरकारी धन का गबन और बच्चों के अधिकारों पर हमला

शौचालय निर्माण कार्य की हकीकत देखी जाए तो यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह सरकारी धन के गबन, कूटरचना और बच्चों के मौलिक अधिकारों के हनन का संगीन मामला है। यदि जांच में यह साबित होता है कि जानबूझकर घटिया सामग्री लगाकर राशि का दुरुपयोग किया गया, तो दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होना तय है। हर स्कूल में सुरक्षित, स्वच्छ और कार्यशील शौचालय देना अनिवार्य है। यहां न शौचालय सुरक्षित था, न कार्यशील। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी भी बराबर के भागीदार बनते हैं।

जांच होगी आश्वासन से नहीं मानेगा गांव

घटना की सूचना मिलने के बाद जनपद शिक्षा केंद्र नईगढ़ी के समन्वयक राम मणि सिंह ने कहा कि पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज कराई जा रही है और निर्माण कार्य की भी विभागीय जांच कराई जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाएगी।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी हर बार घटना के बाद जांच का आश्वासन देते हैं, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती। इसी कारण भ्रष्टाचार और चोरी दोनों बढ़ते जा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि अब उनके बच्चे खुले में जाने को मजबूर हैं, जिससे लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों खतरे में है। शिक्षा विभाग और प्रशासन को अब तय करना होगा कि वे इस मामले को सिर्फ एक सामान्य चोरी मानकर फाइल बंद करेंगे या फिर निर्माण में हुए घपले और चोरी दोनों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जेल भेजेंगे। अन्यथा शिक्षा के मंदिर का यह अपमान प्रदेश भर में व्यवस्था की पोल खोलता रहेगा।