खेतों में बिखरे अरमान: चक्रवाती बारिश बनी किसानों के लिए आफत, गन्ना-धान की फसलें जमींदोज
मऊगंज में तूफानी बारिश से फसलें बर्बाद: कर्ज, खाद-बीज की महंगाई और फिर प्रकृति का कोप, दोहरी मार से टूटी किसानों की कमर; प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग
मऊगंज से राजेंद्र पयासी की रिपोर्ट।
मानसून के अंतिम दौर यानी विदाई के समय रिमझिम फुहारें जब तूफान का रूप धारण कर लें, तो लहलहाते खेतों में पसरा सन्नाटा अन्नदाता के हृदय को चीर देता है। मऊगंज जिले में पिछले 4 दिनों से जारी अविराम बारिश और तेज हवाओं के बवंडर ने कुछ ऐसा ही विनाश रचा है। मेघों की गड़गड़ाहट और पवन के वेग ने गन्ना और धान की फसलों को खेतों में ही धराशायी कर दिया। 4 दिनों तक सूर्यदेव बादलों की ओट में रहे और धरती पर अंधेरा छाया रहा। रविवार को जब सूर्य की सुनहरी किरणें धरती पर पड़ीं, तो किसानों के सपनों के चिथड़े-चिथड़े होने का दृश्य सामने आया।
धान की फसल में रोग के बाद अब बारिश की मार
जिले के मऊगंज, हनुमना और नईगढ़ी सहित सभी तहसील क्षेत्रों में लगभग एक जैसे हालात हैं। पहले धान की फसल में लगे रोग से अन्नदाता कराह रहा था और अब चक्रवाती बारिश ने किसानों को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। कर्ज, खाद-बीज की बढ़ती कीमतों और फसल पर आई प्राकृतिक आपदा ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
हनुमना तहसील के मुरहना नाउन गांव निवासी प्रगतिशील कृषक हरिशंकर पाण्डेय बीते कई सालों से गन्ने की खेती कर घर पर ही गुड़ निर्माण का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल 5 से 6 लाख रुपये तक का व्यवसाय हो जाता था। इस साल उन्होंने पूरे मनोयोग से फसल तैयार की थी, लेकिन बीते 4 दिनों की तूफानी बारिश ने पूरी फसल को जमीन पर गिरा दिया। गन्ने के आड़े गिरने से अब गुड़ के व्यवसाय पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
कर्ज लेकर की धान की खेती, बारिश ने छीन ली उम्मीद
नईगढ़ी तहसील के शाहपुर गांव निवासी लघु कृषक मदन मोहन मिश्रा की कहानी कर्ज और कष्ट की दास्तान है। उन्होंने बताया कि कर्ज लेकर धान की खेती की थी। पहले खेत में रोग ने दस्तक दी और फिर तूफानी बारिश ने रही-सही फसल को भी नष्ट कर दिया। प्रकृति की इस दोहरी मार से किसान पूरी तरह टूट गए हैं।
मऊगंज तहसील के सेमरिया कुंज बिहारी निवासी सतानंद द्विवेदी ने कहा कि क्षेत्र के किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। धान की फसल धराशायी होने से उत्पादन में 48 से 50 फीसदी तक की कमी आने की आशंका है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल राजस्व अमले के माध्यम से नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है।
बंधवा भाईबाट गांव निवासी राधिका प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि महंगे डीजल, दो गुनी दर पर खरीदी गई खाद-बीज और दिन-रात की मेहनत से फसल तैयार की थी। जब मेहनत का फल मिलने की बारी आई, तो रोग और तूफानी बारिश ने खलिहान तक पहुंचने से पहले ही सब कुछ छीन लिया।
नुकसानी का सर्वे कराकर दिलाई जाए क्षतिपूर्ति
प्रकृति की दोहरी मार से परेशान क्षेत्र के किसान युवराज सिंह करह, रतनलाल मिश्र नईगढ़ी, विभूतिभूषण सिंह मऊगंज, राम सिपाही पटेल देवरिहनगांव, मोतीलाल साकेत धर्मनगरी, जगदीश सिंह जिलहड़ी, अनुसुइया प्रसाद पटेल बर्रोहा और परमानंद मिश्रा कोट आदि ने शासन-प्रशासन से राहत की मांग की है।
किसानों ने कहा कि उनके दर्द को समझते हुए नियमानुसार पटवारियों के माध्यम से फसल नुकसानी का सर्वे और पंचनामा तैयार कराया जाए। साथ ही फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा और फसल बीमा का लाभ दिलाया जाए, ताकि अन्नदाता इस संकट से उबरकर फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
Varsha Shrivastava 
