रूझौही न्यूक्लियर प्लांट का ग्रामीणों ने किया विरोध: बिना सहमति सर्वे कराने पर उठे सवाल
रीवा के रूझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया। बोरहोल सर्वे के लिए पहुंची मशीनें लौटाईं, ग्रामसभा की सहमति पर उठे सवाल।
रीवा। सिरमौर तहसील के ग्राम पंचायत सरई कला अंतर्गत रूझौही मौजा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। शनिवार को परियोजना से संबंधित सर्वे और बोरहोल परीक्षण के लिए पहुंची कंपनी की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने मौके पर एकत्रित होकर बोरिंग मशीनों से होने वाले काम पर आपत्ति जताई और ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी तरह की गतिविधि संचालित नहीं करने की मांग की।
ग्रामीणों के विरोध के बाद कंपनी की टीम को मशीनों के साथ वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब ग्रामसभा पहले ही प्रस्तावित परियोजना को लेकर अपनी असहमति दर्ज करा चुकी है, तो ग्राम पंचायत और स्थानीय लोगों की स्पष्ट सहमति के बिना भू-तकनीकी जांच के लिए बोरिंग मशीनें क्यों भेजी गईं?
बोरिंग मशीनों पर ग्रामीणों की आपत्ति
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम मिश्री परीक्षण और बोरहोल के लिए रुड़की स्थित कंपनी की दो बोरिंग मशीनें रूझौही गांव पहुंची थीं। इसकी जानकारी मिलते ही सरई कला और रूझौही के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों ने मशीनों से होने वाले कार्य का विरोध करते हुए कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की जांच या गतिविधि शुरू करने से पहले ग्रामसभा और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से क्षेत्र में कुल आठ बोरहोल किए जाने की योजना है। इनमें चार बोरहोल करीब 100 मीटर और चार बोरहोल लगभग 50 मीटर गहराई तक किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण को लेकर चिंता
प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ पर्यावरण और स्थानीय आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी बड़े औद्योगिक या परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों और ग्रामसभा की भूमिका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
28 हजार करोड़ की परियोजना, 1000 मेगावाट उत्पादन की चर्चा
प्रस्तावित परियोजना को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार इसे टाटा पावर से जुड़ा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 28 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
परियोजना की क्षमता को लेकर अलग-अलग चरणों में 220 मेगावाट से बढ़ाकर 1000 मेगावाट और भविष्य में 2400 मेगावाट तक उत्पादन की योजना की चर्चा सामने आई है। प्रशासनिक स्तर पर करीब 169 हेक्टेयर भूमि से संबंधित जानकारी भी सामने आई है। हालांकि परियोजना के विभिन्न चरणों, वास्तविक स्वीकृतियों और वर्तमान स्थिति को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी स्पष्ट किया जाना बाकी है।
कलेक्टर के पत्र के बाद भू-तकनीकी जांच
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 117/2026, दिनांक 21 अगस्त 2026 के माध्यम से भू-तकनीकी जांच के लिए अनुमति और आवश्यक सहयोग के निर्देश दिए जाने के बाद क्षेत्र में सर्वे की गतिविधियां शुरू हुईं। इसके बाद कंपनी की टीम मशीनों के साथ गांव पहुंची, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण मौके पर काम नहीं हो सका।
ग्रामसभा की सहमति पर सवाल
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ग्रामसभा की ओर से परियोजना को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है और ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं, तो भू-तकनीकी जांच किस प्रक्रिया और किन शर्तों के तहत कराई जा रही है?
ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या उनकी आपत्तियों पर विधिवत सुनवाई की गई है? क्या ग्रामसभा को परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई है? और क्या सर्वे तथा भू-तकनीकी जांच से पहले स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी दी गई थी?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा जवाब
ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। इनमें सर्वे की अनुमति, भूमि की स्थिति, परियोजना की स्वीकृतियां, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों पर पड़ने वाले संभावित असर से संबंधित जानकारी शामिल है।
ग्रामीणों की मांग है कि ग्रामसभा की आपत्तियों को रिकॉर्ड में लिया जाए और परियोजना से जुड़े मुद्दों पर खुली सुनवाई कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर स्थानीय लोगों की चिंताओं और अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। किसी भी बड़ी परियोजना के संबंध में क्षेत्रवासियों को विश्वास में लेना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखना जरूरी है।
फिलहाल रूझौही और सरई कला क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर हलचल बढ़ गई है। ग्रामीणों के विरोध के बाद अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के रुख पर नजर है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई करता है और परियोजना से जुड़े सवालों का क्या जवाब देता है।

