Public Vani Exclusive : मास्टर प्लान ड्राफ्ट में सड़कों से तय होंगी गतिविधियां

Public Vani Exclusive : रिहायशी इलाकों में मॉल और शोरूम की अनुमति मुश्किल 18 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर नहीं खुलेंगी नई दुकानें

Public Vani Exclusive : मास्टर प्लान ड्राफ्ट में सड़कों से तय होंगी गतिविधियां

मुक्तेश रावत @ भोपाल

राजधानी में अंधाधुंध व्यवसायीकरण पर लगाम लगाने के लिए भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) के ड्राफ्ट (Master Plan Draft) में अहम कदम उठाए गए हैं। नए ब्लूप्रिंट के अनुसार अब रहवासी इलाकों में शॉपिंग मॉल और बड़े कॉमर्शियल शोरूम खोलने की अनुमति मिलना बेहद मुश्किल होगा। इसके अलावा रिहायशी कॉलोनियों के अंदर दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को पूरी तरह से सड़कों की चौड़ाई से लिंक कर दिया गया है।

सरकार के इस कदम से जहां एक तरफ कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी, वहीं रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से बाजार चला रहे कारोबारियों पर नकेल कसेगी।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भोपाल में रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की गई थी। भोपाल नगर निगम ने आठ हजार से अधिक नोटिस जारी किए थे। निगम ने 150 से 200 प्रतिष्ठान सील भी किए थे। इस कार्रवाई का शहर के व्यापारियों ने जबरदस्त विरोध किया था और बाजार बंद रखे थे।

अरेरा कॉलोनी और शाहपुरा पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में

रिहायशी इलाकों के चरित्र को बनाए रखने के लिए पूरे आवासीय शहरी क्षेत्र को 5 अलग-अलग जोन (आरजी 1 से आरजी 5) में वगीकृत किया गया है। चार इमली, अरेरा कॉलोनी, चूना भट्टी और श्यामला हिल्स जैसे शहर के प्रमुख और पर्यावरण-संवेदनशील वीआईपी इलाकों को आरजी 3 (सीमित घनत्व) जोन में रखा गया है। इन पॉश कॉलोनियों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कॉमर्शियल गतिविधियों पर प्रतिबंध और नियमों की सख्ती सबसे ज्यादा लागू रहेगी।

चुनिंदा और सीमित गतिविधियां हो सकेंगी

मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में रिहायशी इलाकों के भीतर व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर सीमाएं तय की गई हैं। यदि किसी रहवासी इलाके या कॉलोनी के अंदर की मुख्य सड़क 18 मीटर से कम चौड़ी है, तो वहां किसी भी नई दुकान, शोरूम या कॉमर्शियल ऑफिस को खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस श्रेणी की सड़कों पर स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए केवल चुनिंदा और सीमित मिश्रित गतिविधियों की अनुमति शर्तों के साथ मिल सकेगी। आवासीय क्षेत्रों से गुजरने वाली केवल बड़ी सड़कों के किनारों पर योजनाबद्ध तरीके से कॉमर्शियल गतिविधियों के लिए स्पेस (फ्लेक्सिबल जोनिंग) दिया जाएगा।

सीलबंद दुकानों को फिलहाल राहत नहीं, नई कार्रवाई भी नहीं

मास्टर प्लान का नया ड्राफ्ट आने के बाद भी उन व्यापारियों को तुरंत कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है, जिनकी दुकानें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवासीय क्षेत्रों में पहले ही सील की जा चुकी हैं। न्यायपालिका की तरफ से यह साफ संकेत है कि यह केवल एक 'प्रस्तावित ड्राफ्ट' है।

जब तक सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से इसे सरकार की और से अंतिम रूप से अधिसूचित नहीं कर दिया जाता, तब तक ऐसे प्रतिष्ठानों को रेगुलराइज करने का रास्ता नहीं खुल पाएगा। हालांकि, ड्राफ्ट जारी होने के बाद से नगर निगम ने नई कार्रवाई रोक रखी है। न तो नोटिस जारी किए जा रहे हैं और न ही सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।