पब्लिक वाणी खास खबर : माशिमं नवंबर में कराएगा डीएड दिसंबर में आएगी टीईटी की बारी
Public Vani Khas Khabar : TET के लिए 30 हजार शिक्षकों ने किए आवेदन, जिला स्तर पर बनेंगे परीक्षा केंद्र; माशिमं परीक्षा की तैयारियों को लेकर जल्दी जारी करेगा गाइडलाइन
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल नवंबर में डीएड और दिसंबर में टीईटी कराने की तैयारी कर रहा है। टीईटी में तीस हजार शिक्षकों ने आवेदन किए है। परीक्षा के लिए जिला स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाएं जाएंगे। माशिमं की ओर से इसको लेकर गाइडलाइन जल्दी जारी की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2026 की तारीख तय कर दी गई थी। कर्मचारी चयन मंडल परीक्षा बीती 12 अक्टूबर से आयोजित कराने वाला था। यह परीक्षा ऑनलाइन होना थी। शिक्षक आनलाइन परीक्षा का विरोध कर रहे थे। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऑफलाइन परीक्षा कराने की घोषण कर दी।
कर्मचारी चयन मंडल ने ऑफलाइन परीक्षा कराने से इंकार कर दिया। इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने टीईटी परीक्षा कराने की जिम्मेदारी मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल को दी है। माशिमं अब नवंबर में डीएड की परीक्षा कराएगा। माशिमं ने डीएड की समय-सारिणी जारी कर दी है।
डीएड परीक्षा 16 नवंबर से 27 नवंबर के बीच होगी। इसके बाद दिसंबर में टीईटी की परीक्षा हो सकती है। साथ में परीक्षा के लिए जिला स्तर पर केंद्र बनाएं जाएंगे। जिन जिलों में परीक्षार्थियों की संख्या ज्यादा होगी, वहां तहसील व ब्लाक स्तर तक भी केंद्र बनाए जा सकते है।
परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों को लेकर संशय की स्थिति बरकरार
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा के दायरे में वर्तमान में करीब डेढ़ लाख शिक्षक आ रहे हैं। यह भर्तियां 2009 तक की है, लेकिन 2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों ने ईएसबी (पूर्व में व्यापमं) की परीक्षा दी है, लेकिन इस दौरान मप्र की भर्ती परीक्षा व एनसीटीई के नार्म्स में शामिल कुछ अंतर था। इसे लेकर शिक्षकों में गफलत की स्थिति बनी हुई है कि इन्हें परीक्षा में होना है कि नहीं।
इसे लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन (एमए) लगाया है। इसमें निर्णय आने के बाद ही तय होगा कि 2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षकों को परीक्षा देना है या नहीं। यदि 2005 से 2009 के बीच भर्ती शिक्षक पात्रता परीक्षा के दायरे से बाहर होते हैं, तो सिर्फ परीक्षा देने वाले करीब 70 हजार शिक्षक ही शेष रहेंगे। 70 हजार शिक्षकों की सीधी भर्ती वर्ष 1998 से 2005 के बीच हुई है। पान्त्रता परीक्षा से उन शिक्षकों भी राहत दी गई है, जिनकी सेवा के पांच साल शेष है।
32 हजार शिक्षकों की अटकी पदोन्नति
स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया लबित है, जबकि जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधानपाठकों को व्याख्याता के पद पर पदोन्नति दे दी है। इस अंतर को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों में नाराजगी है।
शासकीय शिक्षक संगठन से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि दोनों विभागों में समान योग्यता, आर्हता और सेवा शर्तों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को जनजातीय कार्य विभाग में पदोन्नति का लाभ मिल रहा है, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक इससे वंचित हैं।
संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि जनजातीय कार्य विभाग में पिछले कुछ महीनों में सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता के पद पर पदोन्नतियां की जा चुकी हैं। इसके विपरीत, स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षक, सहायक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक की पदोन्नति प्रक्रिया अब भी लंबित है। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति के आदेश जारी नहीं होना चिंता का विषय है।
कौशल ने कहा कि करीब दो साल पहले उच्च पद का प्रभार संभालने वाले शिक्षकों को भी अब तक नियमित पदोन्नति के आदेश नहीं मिले हैं। लबे समय से उच्च पद का दायित्व निभाने के बावजूद नियमित पदोन्नति का लाभ नहीं मिलना शिक्षकों के सेवा हितों से जुड़ा मुद्दा है। संगठन मध्यप्रदेश ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

