SC का दिल्ली पुलिस को नोटिस : कहा- सारे बैरिकेड हटाए जाएं, आवाजाही और इंटरनेट सेवा को करें सामान्य
SC on CJP Protest : सीजेपी प्रदर्शन के दौरान मेट्रो-ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने सुनवाई की।
SC on CJP Protest : नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। सीजेपी प्रदर्शन के दौरान मेट्रो-ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर रविवार को सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट बाधित नहीं होना चाहिए और लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि, बीते 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देशित किया था कि, दिल्ली आने वाली मेट्रो और टेनों की आवाजाही पर किसी भी तरह की रोक न लगाई जाए। बावजूद इसके बीते शनिवार को दिल्ली के मेट्रों स्टेशन बंद किये गए , दिल्ली आने वाली ट्रेन को कैंसिल किया गया या लेट किया गया। यह कोर्ट के आदेश का सीधा-सीधा उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और 13 अक्टूबर तक जवाब तालाब किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि, कोर्ट के आदेश की अवहेलना के लिए अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए? इससे पहले मजिस्ट्रेड कोर्ट ने सीजेपी लीडर अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह रिहा करने का आदेश दिया। बता दें तीनों को पुलिस ने लगभग 23 घंटे तक अपनी कस्टडी में रखा।
5 वकीलों ने की याचिकाकर्ताओं की पैरवी
मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा। वहीं, एडवोकेट कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और शादान फरासत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा।
दिल्ली पुलिस को दिए ये निर्देश
- मेट्रो और ट्रेनें सामान्य रूप से चलें। कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर ही जरूरी पाबंदियां लगाई जाएं।
- शहर में लोगों का आना-जाना कानून और ट्रैफिक नियमों के मुताबिक जारी रहे।
- बैरिकेड लगाने के फैसले की कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए तुरंत समीक्षा की जाए।
- इंटरनेट सेवाएं बंद न की जाएं। हालांकि, आईटी एक्ट के तहत सरकार के अधिकार बने रहेंगे।
- धारा 163 के प्रतिबंध वाले इलाके से बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों को हिरासत में न लिया जाए।

