दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस: दिव्यांग पेंशन के नियम बदले; कैबिनेट के 3 बड़े फैसले

केंद्र सरकार ने 11.40 लाख रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस देने की मंजूरी दी। जानिए दिव्यांग पेंशन के नए नियम और सामाजिक सहायता योजना से जुड़े 3 बड़े फैसले।

दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस: दिव्यांग पेंशन के नियम बदले; कैबिनेट के 3 बड़े फैसले

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए करीब 11.40 लाख पात्र कर्मचारियों को 78 दिन का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) देने की मंजूरी दी है। इस पर सरकार लगभग 2,009 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके साथ ही केंद्रीय कैबिनेट ने दिव्यांग पेंशन की पात्रता में बदलाव और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने सहित तीन अहम फैसले लिए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की जानकारी दी।

रेलवे के कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस

केंद्र सरकार के फैसले से रेलवे के लगभग 11 लाख 40 हजार पात्र कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस दिया जाएगा। इस मद में करीब 2,009 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सरकार के मुताबिक, रेलवे कर्मचारी यात्रियों की सुरक्षित और सुचारु यात्रा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम करते हैं। त्योहारों के दौरान भी ट्रैक, इंजन, वर्कशॉप और अन्य रेल सेवाओं से जुड़े कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। कर्मचारियों के इसी योगदान को ध्यान में रखते हुए बोनस को मंजूरी दी गई है।

दिव्यांग पेंशन के लिए 40% दिव्यांगता की पात्रता

कैबिनेट ने दिव्यांग पेंशन से जुड़े नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत की जाएगी। इसके साथ ही पात्रता जन्म से लागू करने का प्रावधान बताया गया है।

योजना के तहत 0 से 79 वर्ष की उम्र के पात्र लाभार्थियों को 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लाभार्थियों को 625 रुपये की सहायता दिए जाने का उल्लेख है।

हालांकि, नए नियमों की विस्तृत पात्रता शर्तों, लाभार्थियों की संख्या और उनके क्रियान्वयन से संबंधित दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी किए जाने हैं। इसलिए पेंशन के लिए आवेदन करने से पहले आधिकारिक नियमों की पुष्टि करना जरूरी होगा।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम 2031 तक जारी रहेगा

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए 53,428 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है।

सरकार के अनुसार, इस कार्यक्रम के अंतर्गत देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिलने का अनुमान है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पात्र बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

योजनाओं के नाम बदलने का प्रस्ताव

कार्यक्रम के तहत विभिन्न योजनाओं के नाम भी बदले जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • बुजुर्गों की पेंशन योजना को प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना नाम दिया जाएगा।
  • विधवा पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना होगा।
  • दिव्यांग पेंशन योजना को प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कहा जाएगा।
  • राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना किया जाएगा।

इन बदलावों के बावजूद संबंधित पेंशन और परिवार सहायता योजनाओं को जारी रखने की बात कही गई है।

आम लोगों और कर्मचारियों पर क्या असर?

केंद्र सरकार के इन तीन फैसलों का असर रेलवे कर्मचारियों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों पर पड़ सकता है। रेलवे कर्मचारियों को बोनस मिलने से त्योहार के समय अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, दिव्यांग पेंशन की पात्रता सीमा में प्रस्तावित कमी से अधिक लोगों के योजना के दायरे में आने की संभावना है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल तक जारी रखने से पात्र लाभार्थियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन आगे भी जारी रह सकेगा। हालांकि, दिव्यांग पेंशन के नए नियमों और योजना के नामों में बदलाव की वास्तविक स्थिति समझने के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं का इंतजार करना होगा।