Sajha Chulha scheme : मध्य प्रदेश रसोईया महासंघ ने CM को लिखा पत्र, साझा चूल्हा मानदेय बढ़ाने समेत की ये मांगें
Sajha Chulha scheme : मध्य प्रदेश रसोईया महासंघ ने कहा कि साझा चूल्हा योजना की लागत राशि अभी 3-4 महीने बाद मिलती है। इसे हर महीने की 5 तारीख तक नियमित रूप से जारी किया जाए।
Sajha Chulha scheme : भोपाल। प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह रसोईया महासंघ मध्य प्रदेश ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र में साझा चूल्हा योजना और स्व सहायता समूहों से जुड़ी समस्याओं के निराकरण का अनुरोध किया गया है। लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की अपील की गई है। महासंघ ने मानदेय बढ़ाने से लेकर नियमित राशि जारी करने तक कई बिंदु रखे हैं।

राशि समय पर जारी करने और मानदेय बढ़ाने की मांग
1. साझा चूल्हा योजना की लागत राशि वर्तमान में 3-4 माह बाद प्राप्त होती है। इसे प्रत्येक माह की 5 तारीख तक नियमित रूप से जारी किया जाए।
2. साझा चूल्हा योजना में कार्यरत रसोइया बहनों का वर्तमान ₹500 मासिक मानदेय बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह किया जाए तथा यह मानदेय समूह की लागत राशि से नहीं काटा जाए।
3. पूर्व की लम्बित राशि तत्काल जारी किया जाए। एवं वर्तमान में महिने की एक निश्चित तारीख को प्रदेश की सभी जिलों में एक साथ राशि जारी की जाए।
4. पोर्टल पर दर्ज वास्तविक हितग्राहियों की संख्या के अनुसार THR की 100% राशि एवं खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।
5. वर्ष 2019 से चली आ रही दरों के अनुसार नाश्ता के लिए 2.88 पैसे एवं भोजन के लिए 4.82 पैसे समूहों को दिये जाते है जिसमें महंगाई को ध्यान में रखते हुए आवश्यक वृद्धि करते हुए साझा चूल्हा योजना में नाश्ते की राशि ₹15 एवं भोजन की राशि ₹25 प्रति हितग्राही निर्धारित की जाए।

6. वर्तमान में समूहों को सांइग चूल्हा योजना के अंतर्गत पोर्टल पर दर्ज वास्तविक हितग्राहियों की संख्या के अनुपात में धवप्ति चाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है मात्र 20 से 25 % ही मिल रहा है। अतः हमारी मांग है कि पोर्टल पर दर्ज हितग्राहियों की वास्तविक संख्या के मान से 100 प्रतिशत खाद्यान्न का आवंटन एवं वितरण समूहों को सुनिश्चित किया जाए।
7. साझा चूल्हा योजना के खाद्यान्न उठाव में समूह के अध्यक्ष एवं सचिव के फिंगर प्रिंट से ही खाद्यान्न उठाव किया जाय। वर्तमानः में दुकानदारों द्वारा फिंगरप्रिंट लगाकर खाद्यान्न उठाव किया जाता है जिसमें पर्याप्त भ्रष्टाचार होता अतः दुकानदारों की फिंगरप्रिंट लगाए जाने की व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए।
8. महिला एवं बाल विकास विभाग में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, पसेंट प्रथा एवं ठेकेदारी प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाए।
9. वर्ष 2002 से निरंतर शासन की योजनाओं में कार्यरत महिला स्व सहायता समूहों के अनुभव एवं योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें शासन की अन्य योजनाओं में कार्य प्रदान करने हेतु प्राथमिकता दी जाए तथा अनुभवी समूहों के हित में विशेष प्रावधान किया जाए।
10. विगत 25 वर्षों से शासन की योजनाओं का जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक संचालन कर रहे महिला स्व सहायता समूहों के अनुभव एवं योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें शासन की स्थायी सेवा व्यवस्था से जोड़ा जाए तथा समूहों के कार्य को "स्थायी दर्जा" प्रदान किया जाए।

महासंघ ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें। तत्काल आवश्यक निर्णय लेकर शासनादेश जारी करें। इससे साझा चूल्हा योजना से जुड़ी हजारों महिला स्व सहायता समूहों और रसोइया बहनों को समय पर भुगतान तथा उचित अधिकार मिल सकेंगे।

