पब्लिक वाणी खास खबर : निगम का शीतल पैराडाइज के मालिक पर शिकंजा, जांच के लिए बनाई कमेटी
Public Vani Khas Khabar : शीतल पैराडाइड में चल रही गड़बड़ियों को पब्लिक वाणी ने प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
पब्लिक वाणी @ भोपाल
भोपाल के अयोध्या नगर स्थित शीतल पैराडाइज के मालिक मुकेश जैन पर नगर-निगम ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शीलत पैराडाइज की मिल रही शिकायतों के बाद निगम ने जांच कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी एक सप्ताह के अंतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। शीतल पैराडाइड में चल रही गड़बड़ियों को पब्लिक वाणी ने प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
दरअसल, शीतल पैराडाइज में कुल 146 फ्लैट बनाने की डेवलपमेंट परमिशन बताई जाती है। इसमें 126 सामान्य, 12 इंडब्ल्यूएस और 8 एलआईजी फ्लैट शामिल है, है, लेकिन नगर निगम के निरीक्षण में मौके पर 222 फ्लैट मिले हैं। यानी अनुमति से 76 फ्लैट अधिक है।
सवाल यह है कि जब अनुमति 146 फ्लैट की थी, तो 222 फ्लैट कैसे बन गए। बताया जाता है कि अतिरिक्त निर्माण के लिए कोई अनुमति भी नहीं ली गई। यह भी सामने आया कि कॉलोनी के बेसमेंट में करीब 1500 वर्गफुट क्षेत्र में कम्युनिटी हॉल और सोसायटी कार्यालय है, जबकि यह स्थान पार्किंग के लिए निर्धारित है। इसके अलावा बेसमेंट में तीन अतिरिक्त कमरों का भी उल्लेख किया गया है।
इनमें करीब 50 वर्गफुट के एक कमरे में ड्रायवर सौरभ कुशवाहा, दूसरे कमरे में केयरटेकर अरविंद बेलवंशी उर्फ बिट्टू और करीब 40 वर्गफुट के तीसरे कमरे में रमेश कटारा ने अपना निवास बना रखा है। इसी तरह टीएनसीपी द्वारा अप्रूव्ड ले-आउट में ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित भूमि पर जी 2 ब्लॉक प्रस्तावित होने की बात कही गई है, लेकिन वहां ब्लॉक की जगह मंदिर का निर्माण का किया गया है। ऐसे में इंडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित भूमि के उपयोग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठते हैं।
नहीं किया फायर सेफ्टी का ऑडिट
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि बिल्डिंग के फायर सेफ्टी सिस्टम का पिछले कई वर्षों से ऑडिट नहीं हुआ है। अगर यह शिकायत सही है, तो संबंधित विभाग को तत्काल इसकी स्वतंत्र जांच करानी चाहिए, क्योंकि हाईराइज बिल्डिंग में आग जैसी आपात स्थिति के दौरान फायर सेफ्टी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
छोड़े गए स्थान में बना दिए अतिरिक्त फ्लैट
अपार्टमेंट घोषणा पत्र में दूसरे और तीसरे फ्लोर पर खाली छोड़े गए स्थानों पर प्रत्येक फ्लोर पर तीन अतिरिक्त फ्लैट बनाए जाने का मामला है। यानी दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर को लेकर भी जांच की जरूरत है। इसके अलावा दुपहिया वाहनों की पार्किंग के लिए निर्धारित जगह पर बिल्डर का कार्यालय बनाए जाने और दो अन्य कार्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई है। यदि पार्किंग क्षेत्र का व्यावसायिक उपयोग किया गया है, तो इसकी वैधता की जांच भी जरूरी है।
रहवासियों की गंभीर शिकायतें
शीतल पैराडाइज के निवासी दिलीप तिवारी ने बिल्डिंग को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक हाईराइज बिल्डिंग की छत पर मोबाइल टावर लगाया गया है और उसका किराया भी बिल्डर द्वारा वसूला जा रहा है। रहवासियों का कहना है कि बिल्डिंग की लिफ्ट काफी समय से बंद है और लोगों को सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हाईराइज बिल्डिंग में बुजुर्गों, बच्चों और अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है।

