पब्लिक वाणी खास खबर : 21 साल में भी कागजों से जमीन पर नहीं उतर पाईं सड़कें, थमी शहर की रफ्तार

Public Vani Khas Khabar : मास्टर प्लान के बार-बार अटकने और कानूनी अड़चनों के कारण कई सड़कों के एलाइनमेंट में मकान, अवैध कॉलोनियां बन गईं। इससे लोगों को हर दिन भारी ट्रैफिक जाम और संकरी सड़कों से जूझना पड़ रहा है।

पब्लिक वाणी खास खबर : 21 साल में भी कागजों से जमीन पर नहीं उतर पाईं सड़कें, थमी शहर की रफ्तार

मुक्तेश रावत @ भोपाल

राजधानी का इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क नेटवर्क पिछले दो दशकों से एक बड़े गतिरोध का सामना कर रहा है। वर्ष 1995-2005 के मास्टर प्लान की अवधि खत्म होने के बाद से लेकर अब तक, शहर के विकास के लिए प्रस्तावित की गई अधिकांश मुख्य और लिंक सड़कों का निर्माण नहीं हो सका है। मास्टर प्लान के बार-बार अटकने और कानूनी अड़चनों के कारण कई सड़कों के एलाइनमेंट में मकान, अवैध कॉलोनियां बन गईं। इससे लोगों को हर दिन भारी ट्रैफिक जाम और संकरी सड़कों से जूझना पड़ रहा है।

भोपाल में नई सड़कों के निर्माण न हो पाने और पुराने प्रस्तावों के खटाई में पड़ने के पीछे तीन सबसे बड़े कारण रहे। पहला, साल 2005 के बाद से वर्ष 2009, 2020 और 2023 में मास्टर प्लान के ड्राफ्ट तैयार किए गए, लेकिन हर बार राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, आपत्तियों और तकनीकी खामियों के चलते यह मंजूर नहीं हो सके।

दूसरी वजह यह रही कि, जिन रूटों से 30 से 60 मीटर चौड़ी मास्टर प्लान की सड़कें गुजरनी थीं, वहां की अधिकांश जमीनें निजी स्वामियों की थीं। सरकार के पास भू अधिग्रहण के लिए भारी-भरकम मुआवजा देने के लिए बजट की कमी रही और कई जगह जमीन मालिक अदालतों में चले गए, जिससे काम सालों-साल ठप रहा।

भू माफियाओं ने उठाया मास्टर प्लान न आने का फायदा

मास्टर प्लान के लटके रहने का सबसे ज्यादा फायदा भू-माफियाओं और अवैध निर्माणकर्ताओ ने उठाया। प्रस्तावित सड़कों के 'राइट ऑफ वे' (सड़क के लिए आरक्षित मार्ग) पर समय रहते रोक न लगने से वहां पक्के मकान, दुकानें और अवैध कॉलोनियां खड़ी हो गई। कुछ सड़कों के एलाइनमेंट में तो सैंकड़ों वैध, अवैध निर्माण हो गए। अब इन निर्मित क्षेत्रों को तोड़ना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में इस तरह की सड़कों को या तो ड्रॉप कर दिया गया या उनका एलाइनमेंट बदलना पड़ रहा है।

यह सड़कें अटकीं, कारण

  • अयोध्या बायपास से एरोसिटी वाया आरजीपीवी तक 24 मीटर चौड़ी सड़क, आरजीपीवी कैंपस व कुछ अन्य बिल्डिंगों के बीच से गुजरने के कारण वैकल्पिक रूट प्रस्तावित।
  • संजीव नगर से वाया बायपास रोड होते नेवरी तक 24 मी चौड़ी रोड, नेवरी बसाहट की वजह से रूका।
  • चर्च से वाया विदिशा बायपास होते हुए लालघाटी चौराहा तक 45 मीटर सड़क, प्रस्तावित सडक सिंगारचोली पहाड़ी के एक मकान और चर्च के बीच से निकलेगी, यह संभव नहीं इसलिए वैकल्पिक रूट प्रस्तावित।
  • छोला से बेस्ट प्राइस तक 45 मीटर चौड़ी सड़क, यह नहीं बन सकती क्योंकि साइट पर अवैध कॉलोनियां है।
  • अयोध्या बायपास से प्रभात चौराहा तक 7.70 किमी लंबी और 30 मीटर बौड़ी सड़क, सेमरी कला और हिनोतिया कछिया से करोद चौराहा तक इस रोड पर 446 मकान है।
  • नरेला शंकरी होते हुए जेके रोड से बायपास, नरेला शंकरी गांव के मकान और बस्तहटों के कारण निर्माण संभव नहीं।
  • अयोध्या बायपास, नरेला शंकरी से सेवनिया ओंकारा, बसाहटों के कारण बनना संभव नहीं।
  • नयापुरा और कोलार रोड होते हुए सनखेड़ी से चीचली, प्रस्तावित सड़क में मकान हैं।
  • चूना भट्टी से पंडित खुशीलाल शर्मा अस्पताल, एलाइनमेंट में चूना भट्टी की पुरानी बसाहट और पहाड़ी की ढलान, निर्माण संभव नहीं।
  • गोविदपुरा औद्योगिक क्षेत्र से दामखेड़ा बायपास, औद्योगिक क्षेत्र के बीच से प्रस्तावित है, कई उद्योग एलाइनमेंट से प्रभावित होंगे।
  • एसटीपी होते हुए अयोध्या बायपास से सेवनिया ओंकारा, यह सड़क बनाना संभव नहीं है क्योंकि एसटीपी को आवंटित जमीन के बीच से गुजरती है।