पब्लिक वाणी खास खबर : हाईकोर्ट के आदेश और मुख्यमंत्री की मंशा के बावजूद नहीं की गई DPC

Public Vani Khas Khabar : गृह विभाग के लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को सहायक अभियोजन अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने का मामला अटका

पब्लिक वाणी खास खबर : हाईकोर्ट के आदेश और मुख्यमंत्री की मंशा के बावजूद नहीं की गई DPC

गुरेन्द्र अग्निहोत्री @ भोपाल

हाईकोर्ट के आदेश और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सकारात्मक मंशा के बावजूद गृह विभाग के लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को सहायक अभियोजन अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने का मामला अटका हुआ है। तमाम प्रयासों के बावजूद इस मसले को अफसर नहीं सुलझा पा रहे हैं। बताते हैं कि कुछ अफसर अदालत की आड़ लेकर जानबूझ कर इस पर अड़ंगा लगा रहे हैं। लिहाजा मामला अधर में फंसा है और नुकसान पदोन्नति की राह देखने वाले कर्मचारियों का हो रहा है। 

दरअसल, गृह विभाग के लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को सहायक अभियोजन अधिकारी (एडीपीओ) के पद पर पदोन्नति दिए जाने का प्रावधान भर्ती नियमों में है। एडीपीओ के 90 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 10 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाने का नियम है। इसके लिए उम्मीदवार का सात साल की शासकीय सेवा और विधि में स्नातक होना जरूरी है। ऐसे पात्र कर्मचारी पिछले दस सालों से पदोन्नति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नहीं होने के कारण वे विभागीय तौर पर परेशान थे। 

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कराए जाने के बाद लगभग सभी विभागों ने प्रक्रिया पूरी कर पदोन्नति आदेश जारी कर दिए हैं। कुछ मामलों को लेकर गृह विभाग इसमें अपवाद है। सीएम ने पदोन्नति में अडंगा नहीं लगाने के निर्देश दिए हैं. इसके बावजूद अभियोजन विभाग की पदोन्नति में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।

हाईकोर्ट का आदेश- DPC कर सकता है विभाग

पदोन्नति की घोषणा के बाद पिछले 13 जुलाई को भी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक करने की कवायद हुई थी, लेकिन विभाग के कतिपय अधिकारियों द्वारा तथाकथित कानूनी अड़चन और कोर्ट में किसी याचिका के लंबित रहने का बहाना कर इस प्रक्रिया को पूरा नहीं होने दिया गया। 

हाईकोर्ट में एक बेरोजगार युवक के हवाले से 10 प्रतिशत पदोन्नति के प्रावधान को खत्म करने और विधि स्नातक हुए अभ्यर्थी की डिग्री की वैधता पर सवाल उठाते हुए पदोन्नति प्रक्रिया को नहीं करने या प्रावधान को समाप्त करने की याचिका दायर की गई है, जबकि सभी अभ्यर्थियों द्वारा विभाग से अनुमति लेने के बाद ही डिग्री हासिल की गई है। 

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा भी इस याचिका का 7 अगस्त 2026 को निराकरण कर दिया गया है। अदालत ने पारित आदेश में कहा कि विभाग अपनी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित कर सकता है और सिफारिश बंद लिफाफे में रखें। यह सिफारिश कोर्ट के निर्णय के अध्यधीन रहेगी। 

इसका तात्पर्य है कि हाईकोर्ट द्वारा विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक करने के स्पष्ट निर्देश है। वैसे भी मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए निर्णय के बाद सभी विभागों में जारी पदोन्नति आदेश को भी हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर दायर याचिकाओं के निर्णय के अध्यधीन रखा गया है।

आठ को होने वाली DPC में अधिकारियों ने डाला खलल

हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा तो स्पष्ट आदेश दिए गए है कि विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक कर अनुशंसा को बंद लिफाफे में रखा जाए। लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा भी इस संबंध में 8 अक्टूबर 2026 को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के लिए समय तय कर दिया था। उसके बाद इंदौर में आयोजित हुई डीपीसी के लिए गृह विभाग के अधिकारी इंदौर भी पहुंच गये थे। बावजूद इसके गृह विभाग और अभियोजन के सालों से जमे कुछ अधिकारियों ने इस विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में खलल डाला गया।

बैठक का नहीं बनाया गया कार्यवाही विवरण

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव इस बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए थे और उन्होंने डीपीसी करने के निर्देश भी दिये थे। उनके वीडियो कांफ्रेंसिंग से हटने पर इंदौर पहुंचे अधिकारियों ने उक्त बैठक को नहीं होने दिया और इस बैठक का कोई कार्यवाही विवरण बनाने का निर्देश भी नहीं दिया। 

इस पदोन्नति में एक आपति 40 वर्ष होने पर भी अधिकारियों द्वारा लगाकर इससे ज्यादा उम्र वालों को इसमें शामिल नहीं करने का उल्लेख किया। यह स्थिति तब है, जब एक याचिका में हाईकोर्ट द्वारा कहा गया कि इसमें उम्र विधि स्नातक करने के लिए निर्धारित है, पदोन्नति के लिए नहीं। क्योंकि सहायक अभियोजन अधिकारी की सीधी भतीं में पहले से 45 वर्ष का प्रावधान है।

अफसर पदोन्नति को जलेबी बनाने की कोशिश नहीं करें

मुख्यमंत्री ने पदोन्नति के संबंध में दिनांक 25 अगस्त 2026 को मंत्रालय परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में स्पष्ट कहा था कि अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रमोशन उनके इमोशन से जुड़ा है। पदोन्नति के मामलों को अधिकारी जलेबी बनाने जैसा घुमाने की कोशिश नहीं करें। सीएम की मंशा और अदालत के आदेश के बावजूद इस प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है।