बाजार में 60 हजार का टैंकर, सरकारी दर पर ₹2.5 में खरीदी: उमंग सिंघार ने ACS संजय दुबे के बयान पर उठाए सवाल

‘भ्रष्टाचार 2 करोड़ में ज्यादा होगा या 300 करोड़ में?’ SOR की दरों पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सरकार से सवाल, बोले- SOR बढ़ाकर भ्रष्टाचार कर रहे अफसर

बाजार में 60 हजार का टैंकर, सरकारी दर पर ₹2.5 में खरीदी: उमंग सिंघार ने ACS संजय दुबे के बयान पर उठाए सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी की दरों और भ्रष्टाचार को लेकर सियासत तेज हो गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे के विभागीय बैठक में खरीदी की दरों में विसंगतियों को लेकर दिए गए बयान के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं।

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीदी में शेड्यूल ऑफ रेट्स (SOR) की बढ़ी हुई दरों के कारण जनता के पैसे का नुकसान हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब बाजार में सामग्री कम कीमत पर उपलब्ध है, तो सरकारी व्यवस्था में उसी सामान की कीमत कई गुना अधिक क्यों है?

‘पहले SOR की दरें कम करें अधिकारी’

उमंग सिंघार ने कहा कि ACS संजय दुबे के बयान से यह समझ में आता है कि मध्य प्रदेश में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में बाजार की दरों पर सामग्री खरीदना चाहती है, तो सरकारी दरों में तत्काल सुधार क्यों नहीं किया जाता? सिंघार ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों से अपने-अपने विभागों के SOR की समीक्षा कर दरें कम करने की दिशा में काम करने की बात कही।

उन्होंने GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल के माध्यम से होने वाली सरकारी खरीदी पर भी सवाल उठाए। सिंघार के मुताबिक, सरकारी खरीदी में दरों और बाजार मूल्य के बीच अंतर की जांच होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

60 हजार का टैंकर 2.5 लाख में लेने का दावा

नेता प्रतिपक्ष ने विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यों और सामग्री की खरीदी का उदाहरण देते हुए कहा कि विधायकों को अपनी निधि से सीधे बाजार में उपलब्ध सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता नहीं है। उन्हें सरकारी प्रक्रिया और निर्धारित दरों के अनुसार ही खरीदी करानी पड़ती है।

उमंग सिंघार ने दावा किया कि बाजार में करीब 60 हजार रुपए में मिलने वाला पानी का टैंकर सरकारी दरों के तहत 2.5 लाख रुपए में लेना पड़ता है। इसी तरह, उन्होंने सवा लाख रुपए में होने वाली बोरिंग के लिए ढाई लाख रुपए तक खर्च होने और बाजार में 50 से 60 हजार रुपए में मिलने वाली बिजली की डीपी के लिए 2 से 2.5 लाख रुपए तक की राशि निर्धारित होने का आरोप लगाया।

उन्होंने एक नगर पालिका में 60 लाख रुपए में 200 एलईडी बल्ब खरीदे जाने का उदाहरण भी दिया। इसके अलावा फिनाइल की खरीदी में भी दरों को लेकर गड़बड़ी होने का आरोप लगाया। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

‘भ्रष्टाचार 2 करोड़ में ज्यादा या 300 करोड़ में?’

उमंग सिंघार ने विधायक निधि और बड़े सरकारी विकास कार्यों के बजट की तुलना करते हुए सरकार से सवाल किया कि भ्रष्टाचार की आशंका कम राशि वाले कार्यों में अधिक है या सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में? उन्होंने कहा कि एक विधायक को विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए करीब 2 करोड़ रुपए की निधि मिलती है, जबकि उसी क्षेत्र में सरकार 200 से 300 करोड़ रुपए तक के विकास कार्य कराने की बात करती है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पार्षदों को 10 से 25 लाख रुपए तक की राशि मिलती है, जबकि नगरीय क्षेत्रों में विभागों के माध्यम से करोड़ों रुपए के काम होते हैं। ऐसे में केवल जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बजाय सरकारी खरीदी और अधिकारियों द्वारा निर्धारित दरों की भी जांच होनी चाहिए।

CM को 24 घंटे में व्यवस्था सुधारने की चुनौती

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि यदि सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए गंभीर है, तो SOR की दरों में विसंगतियां दूर करने के लिए तत्काल बैठक क्यों नहीं बुलाई जाती? उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 24 घंटे के भीतर अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस व्यवस्था में सुधार की शुरुआत कर सकते हैं। सिंघार ने दावा किया कि सरकार लंबे समय बाद भी इस दिशा में ठोस फैसला नहीं ले पाएगी।

बीजेपी के अभियान पर भी साधा निशाना

बीजेपी के अभियान को लेकर भी उमंग सिंघार ने सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या बीजेपी सरकार और RSS देश के युवाओं को आतंकवादी समझते हैं, जो उन्हें हटाने की बात की जा रही है? सिंघार ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोग केवल भीड़ नहीं, बल्कि देश के नागरिक हैं और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आमजन की आवाज उठाने का काम कर रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंघार ने कहा कि जब राहुल गांधी संसद में देश के नागरिकों की आवाज उठाते हैं, तब अमित शाह सदन में मौजूद नहीं रहते और अपने चैंबर में बैठते हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह को पहले इस सवाल का जवाब देना चाहिए।