Maaya Rajeshwaran : 17 साल की माया राजेश्वरन ने तोड़ा सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड, पुर्तगाल में रचा इतिहास
भारत की 17 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने पुर्तगाल में आईटीएफ डब्ल्यू35 का एकल खिताब जीतकर सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। उन्होंने युगल खिताब भी अपने नाम किया।
Maaya Rajeshwaran Revathi: भारतीय टेनिस की उभरती खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। महज 17 साल की उम्र में माया ने पुर्तगाल के लागोस में आयोजित आईटीएफ डब्ल्यू35 टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ उन्होंने दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। खास बात यह रही कि माया ने इस टूर्नामेंट में एकल के साथ युगल खिताब भी अपने नाम किया।
17 साल की उम्र में सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड तोड़ा
माया राजेश्वरन रेवती ने 17 साल और 121 दिन की उम्र में डब्ल्यू35 स्तर का महिला एकल खिताब जीता। वह इस स्तर या इससे ऊपर का पेशेवर महिला एकल खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले सानिया मिर्जा ने 2004 में 17 साल और 337 दिन की उम्र में अपना दूसरा वर्ल्ड टेनिस टूर एकल खिताब जीता था। माया ने उनसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया। इस तरह भारतीय महिला टेनिस में दो पीढ़ियों की उपलब्धियां एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
फाइनल में स्पेन की खिलाड़ी को सीधे सेटों में हराया
पुर्तगाल के लागोस में 11 अक्टूबर को खेले गए फाइनल मुकाबले में माया का सामना स्पेन की सेलिया सर्विनो रुइज से हुआ। भारतीय खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला 6-4, 6-2 से जीत लिया और अपने करियर का पहला पेशेवर एकल खिताब हासिल किया। माया की इस जीत की खास बात यह भी रही कि उन्होंने मुख्य ड्रॉ में अपने मुकाबलों के दौरान एक भी सेट नहीं गंवाया। फाइनल तक उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली रहा और निर्णायक मुकाबले में भी उन्होंने दबाव के बीच अपना संयम बनाए रखा।
पहले दौर में पिछड़ने के बाद की शानदार वापसी
माया का टूर्नामेंट में सफर आसान नहीं था। उन्हें मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने के लिए क्वालिफाइंग मुकाबले खेलने पड़े। पहले दौर में उनका सामना शीर्ष वरीयता प्राप्त लिथुआनिया की जस्टिना मिकुलस्काइट से हुआ, जो उस समय विश्व रैंकिंग में 246वें स्थान पर थीं।
मुकाबले के शुरुआती सेट में माया 0-5 से पिछड़ गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। शानदार वापसी करते हुए उन्होंने पहला सेट टाईब्रेक में 7-6(1) से जीता और दूसरा सेट 6-1 से अपने नाम कर लिया। इसके बाद उन्होंने अर्जेंटीना की बerta बोनार्डी को 6-2, 6-0 और चीन की तियान जियालिन को 6-2, 6-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में ब्रिटेन की खिलाड़ी के हटने के कारण उन्हें वॉकओवर मिला।
एकल के बाद युगल में भी जीता खिताब
माया की सफलता केवल एकल मुकाबले तक सीमित नहीं रही। उन्होंने यूक्रेन की येलिजावेता कोटलियार के साथ महिला युगल का खिताब भी जीता। फाइनल में इस जोड़ी ने शुरुआती सेट 0-6 से गंवाने के बाद जोरदार वापसी की और मुकाबला 0-6, 6-2, 10-7 से अपने नाम कर लिया।
माया की इस दोहरी सफलता ने भारतीय टेनिस में उनकी संभावनाओं को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं। अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खिताब के बाद उनकी विश्व रैंकिंग में भी बड़ी छलांग लगने का अनुमान था। 19 अक्टूबर के अगले रैंकिंग अपडेट में उनकी रैंकिंग लगभग 1073 से 724 तक पहुंचने का अनुमान जताया गया था, हालांकि अंतिम स्थान उस समय तक होने वाले अन्य परिणामों पर निर्भर करेगा।

