US Elections 2026: अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स के नाम कटे, मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें
US Elections 2026: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन की मतदाता सूची और नागरिकता जांच की कोशिश चर्चा में है। जानिए भारतीय मूल के वोटरों के सर्वे और चुनाव से जुड़े अहम तथ्य।
US Elections 2026 : अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले मतदाता सूची और नागरिकता की जांच का मुद्दा चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि 26 राज्यों में करीब 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है।
अमेरिका में करीब 21 लाख भारतीय मूल के मतदाता बताए जाते हैं। ऐसे में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का रुख चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। पिछले राष्ट्रपति चुनाव में इस समुदाय के बड़े हिस्से ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस का समर्थन किया था। अब सवाल है कि मतदाता सूची की जांच और ट्रंप प्रशासन की नीतियों का आगामी चुनाव पर क्या असर पड़ेगा।
वोटर लिस्ट की जांच क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन मतदाता सूची की जांच पर जोर दे रहा है। सरकार का तर्क है कि इससे मतदान के लिए अयोग्य लोगों के नाम हटाने और चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
इसी मुद्दे पर ट्रंप ‘सेव अमेरिका एक्ट’ का समर्थन कर रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने वालों को अमेरिकी नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज दिखाने पड़ सकते हैं। पहचान से जुड़े नियमों को सख्त करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।
हालांकि, इस तरह के नियमों को लेकर राजनीतिक विवाद है। विरोधियों का कहना है कि जिन अमेरिकी नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें भी मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने या मतदान करने में परेशानी हो सकती है।
चुनाव में धांधली के दावों पर भी विवाद
डोनाल्ड ट्रंप कई बार अमेरिकी चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली होने के आरोप लगा चुके हैं। हालांकि, व्यापक चुनावी धांधली के इन दावों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस की रिसर्च में भी जांच किए गए चुनावों में मतदाता धोखाधड़ी के मामले बेहद कम पाए गए। इसी वजह से मतदाता सूची की जांच और पहचान संबंधी नियमों को लेकर अमेरिका में बहस जारी है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और दूसरे आलोचकों का आरोप है कि सख्त नियमों से कुछ योग्य मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन इसे चुनावी सुरक्षा से जुड़ा कदम बताता है।
ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट से चिंता बढ़ी
मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की लोकप्रियता भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। सर्वे के मुताबिक, केवल 30 प्रतिशत अमेरिकी उनके कामकाज से संतुष्ट थे। अर्थव्यवस्था को लेकर उनकी अप्रूवल रेटिंग 26 प्रतिशत और महंगाई से निपटने के मामले में 17 प्रतिशत बताई गई।
बढ़ती कीमतों और आर्थिक नीतियों को लेकर नाराजगी का असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है। चुनाव से पहले कुछ उम्मीदवारों के ट्रंप से दूरी बनाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, चुनाव में इसका कितना असर होगा, यह मतदाताओं के रुख और चुनावी प्रचार पर निर्भर करेगा।
अमेरिकी संसद में बहुमत बचाना ट्रंप के लिए क्यों जरूरी?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच होते हैं। इन चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—के लिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं।
इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान होना है। वहीं, सीनेट की 100 सीटों में से 35 सीटों पर चुनाव प्रस्तावित है। मौजूदा सीटों के आंकड़ों के अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 और हाउस में 218 सीटें हैं।
अगर रिपब्लिकन पार्टी इन चुनावों में अपना बहुमत खो देती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद में ज्यादा ताकत मिलने से सरकारी नीतियों और प्रस्तावित कानूनों पर उसकी भूमिका बढ़ जाएगी।
भारतीय मूल के वोटर्स अहम फैक्टर
अमेरिका में भारतीय मूल के मतदाताओं की भूमिका इस चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नागरिकता जांच, अर्थव्यवस्था, महंगाई और ट्रंप प्रशासन की नीतियां मतदान के फैसले को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, भारतीय मूल के सभी मतदाताओं की राजनीतिक पसंद एक जैसी नहीं है। चुनाव के नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि अलग-अलग समुदायों के मतदाता किस पार्टी का समर्थन करते हैं और मतदान में कितनी भागीदारी करते हैं।
अब 3 नवंबर के चुनाव पर सबकी नजरें हैं। इन नतीजों से तय होगा कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी संसद में अपना बहुमत बनाए रख पाती है या डेमोक्रेटिक पार्टी को अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलता है।

