फ्रांस-जापान को 2026 का केमिस्ट्री नोबेल: Henri B. Kagan और Kenso Soai को मिला पुरस्कार, मिरर इमेज जैसे अणुओं की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई
2026 का केमिस्ट्री नोबेल Henri B. Kagan और Kenso Soai को, नोबेल विजेताओं ने बताया- दवा के लिए अणु का सही रूप कैसे बनाया जाए, एक रूप 99.99% तक तैयार करने में मिली सफलता
2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक Henri B. Kagan और जापान के वैज्ञानिक Kenso Soai को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों ने अणुओं के ऐसे दो रूपों को समझने और नियंत्रित करने में अहम योगदान दिया, जो एक-दूसरे की मिरर इमेज जैसे दिखाई देते हैं। इस खोज से खास तौर पर दवाओं को बनाने और उनमें सही तरह के अणु का इस्तेमाल करने में मदद मिली है।
यह समस्या रसायन विज्ञान में करीब 100 साल से वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बनी हुई थी। दोनों वैज्ञानिकों के काम ने यह समझने में मदद की कि किसी रासायनिक प्रक्रिया में जरूरत वाले अणु का एक ही रूप ज्यादा मात्रा में कैसे बनाया जा सकता है।
एक जैसे दिखते हैं, लेकिन काम अलग
इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं जैसे हमारे दोनों हाथ। बायां और दायां हाथ देखने में लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। कुछ अणुओं के साथ भी ऐसा ही होता है।
इन अणुओं के दो रूप होते हैं, जो एक-दूसरे की मिरर इमेज होते हैं। वैज्ञानिक जब इन्हें बनाते हैं तो कई बार दोनों रूप एक साथ तैयार हो जाते हैं। समस्या तब होती है जब किसी दवा में सिर्फ एक रूप की जरूरत हो।
किसी अणु का एक रूप बीमारी के इलाज में प्रभावी हो सकता है, जबकि उसका दूसरा मिरर रूप कम असरदार या कुछ मामलों में नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों के लिए यह जरूरी था कि रासायनिक प्रक्रिया को इस तरह नियंत्रित किया जाए कि जरूरत वाला रूप ही ज्यादा मात्रा में बने।
Henri B. Kagan ने दिया रास्ता
Henri B. Kagan ने 1986 में इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया। उन्होंने ऐसी रासायनिक प्रक्रिया विकसित करने में मदद की, जिसमें अणुओं के दोनों रूप बराबर मात्रा में नहीं बनते थे। यानी रासायनिक प्रतिक्रिया को इस तरह नियंत्रित किया जा सकता था कि एक रूप दूसरे की तुलना में काफी ज्यादा बने।
इससे वैज्ञानिकों के लिए अपनी जरूरत के अणु को चुनना और उसकी मात्रा बढ़ाना आसान हुआ। इस काम का दवाओं के विकास में खास महत्व है, क्योंकि दवा बनाने के दौरान किसी खास अणु के सही रूप की जरूरत हो सकती है।
Kenso Soai ने खोज को आगे बढ़ाया
इसके बाद Kenso Soai ने इस विचार को आगे बढ़ाया। उन्होंने 5-pyrimidyl alkanol नाम के रासायनिक पदार्थ पर प्रयोग किए और ऐसी प्रक्रिया दिखाई, जिसमें एक तरह का अणु आगे उसी तरह के दूसरे अणु बनने में मदद कर सकता है।
इसे आसान तरीके से समझें तो शुरुआत में अगर किसी एक प्रकार के अणु थोड़े ज्यादा बन गए, तो वही अणु आगे और अपने जैसे अणु बनने में मदद करने लगे। इसके बाद नए बने अणु भी इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते रहे। इस तरह शुरुआत का छोटा-सा अंतर धीरे-धीरे बहुत बड़ा हो गया और एक ही प्रकार के अणुओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।
2% की शुरुआती बढ़त 87% तक पहुंची
Kenso Soai के 1995 के प्रयोग में शुरुआत में एक प्रकार के अणु की मात्रा दूसरे की तुलना में सिर्फ करीब 2% ज्यादा थी। लेकिन रासायनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह अंतर बढ़कर करीब 87% तक पहुंच गया।
इस प्रयोग ने दिखाया कि शुरुआत में बहुत छोटा अंतर भी आगे चलकर बहुत बड़ा परिणाम दे सकता है। इससे वैज्ञानिकों को ऐसे रासायनिक प्रयोगों की नई दिशा मिली, जिनमें एक खास रूप के अणु को तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
99.99% तक एक ही तरह के अणु
Soai ने 2003 में इसी विचार को और आगे बढ़ाया। उन्होंने ऐसी प्रक्रिया दिखाई, जिसमें एक प्रकार के अणु की मात्रा बढ़ते-बढ़ते 99.99% तक पहुंच सकती थी। इसका मतलब यह था कि रासायनिक प्रक्रिया के अंत में लगभग सभी अणु एक ही रूप के हो सकते हैं। यह दवा बनाने के लिए बेहद उपयोगी तकनीक है, क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को जरूरत वाले अणु का ज्यादा शुद्ध रूप प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
दवाओं के विकास में बड़ा फायदा
इस खोज का सबसे बड़ा महत्व दवा उद्योग में माना जाता है। जब किसी बीमारी के इलाज के लिए किसी खास अणु की जरूरत होती है तो वैज्ञानिक चाहते हैं कि दवा में सही रूप वाला अणु ही मौजूद हो। Henri B. Kagan और Kenso Soai के काम ने रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने और एक खास प्रकार के अणु को ज्यादा मात्रा में बनाने की समझ को मजबूत किया।
इससे नई दवाओं के विकास और बेहतर रासायनिक प्रक्रियाओं को तैयार करने में मदद मिली है। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी Stockholm में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें नोबेल मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए बताई गई है।
Varsha Shrivastava 
